गुजरते हुए इन गलियों से,
तुम्हें मेरी याद तो आती होगी
हसरतें मुझसे मिलने की,
तुम जरूर साथ लाती होगी
परछाइयों में भी अक्सर
तुम मुझे ही तलाशती होगी
वो जगह जहां मिलते थे हम
तुम जरूर वहां थम जाती होगी
मगर,मुझे ना पाकर इन गलियों में
तुम मायूसी से लौट जाती होगी
इश्क़ के मसले पर "ना" कहती हो
मगर "हां" इन गलियों से कह जाती होगी
#Bhagyashree
#review
20 august 2026
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तुम्हें मेरी याद तो आती होगी
हसरतें मुझसे मिलने की,
तुम जरूर साथ लाती होगी
परछाइयों में भी अक्सर
तुम मुझे ही तलाशती होगी
वो जगह जहां मिलते थे हम
तुम जरूर वहां थम जाती होगी
मगर,मुझे ना पाकर इन गलियों में
तुम मायूसी से लौट जाती होगी
इश्क़ के मसले पर "ना" कहती हो
मगर "हां" इन गलियों से कह जाती होगी
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20 august 2026
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एक ख्वाहिश है,
खुद से मिलने की..
एक डर है,
मिलकर क्या कहूँगा...
#Bhagyashree
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22 August 2026
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खुद से मिलने की..
एक डर है,
मिलकर क्या कहूँगा...
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22 August 2026
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कविता क्या है?
तुम्हारे और मेरे बीच की
अनकही बातें..
अनगिनत स्मृतियाँ,
और
अनगिनत सपने...
#bhagyashree
#review
23 aug 2026
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तुम्हारे और मेरे बीच की
अनकही बातें..
अनगिनत स्मृतियाँ,
और
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23 aug 2026
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किसी बंद लिफ़ाफ़े की तलाश जारी है इस मन में,
पुरानी हिना की ख़ुशबू अब भी महकती है तन-मन में।
न जाने कौन-सा ख़त था, जो कभी भेजा नहीं उसने,
जिसकी राह तकते झुर्रियाँ उतर आई हैं दर्पण में।
#Bhagyashree
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पुरानी हिना की ख़ुशबू अब भी महकती है तन-मन में।
न जाने कौन-सा ख़त था, जो कभी भेजा नहीं उसने,
जिसकी राह तकते झुर्रियाँ उतर आई हैं दर्पण में।
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प्रेम कविता… प्रेम कविता…
अधूरा इश्क़… दिल का बसंत …
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
मुलाक़ात की बैचेनी… बैचेनी की साँस...
प्रेम कविता… प्रेम कविता...
धडकते धड़कन का एहसास… टेसू के फ़ूलों को शब्दों का साथ…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
लफ्जों का दायरा… खामोशी का कैनवास …
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
सरिता का बहना… दिल के पन्नों पर चित्रकारी…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
नि:शब्द भाव… अतीत की यादगार तस्वीर…
प्रेम कविता… प्रेम कविता …
हर स्पंदन का स्वर… हर अंतर्मन का गीत…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
शब्दगंध… वर्षा की बूंदे…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
ग्रीष्म का इश्क मौसम … पतझड़ का प्यार…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
अक्षर सौंदर्य… भीड़ में एकांत…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
कविता का मर्म… कविता का रहस्य…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
चांदनी की मंद बयार… यादों का एक वृक्ष नायाब…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
ह्रदय की टहनी पर प्रेम का विश्वास … वफ़ा की वफ़ा
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
प्रेम ऋतु का प्रेम पल्लव... चंद्रमा का शाश्वत प्रेम…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
अश्कों के अश्क… मुस्कराहट की मुस्कुराहट…
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
नैनों की प्रीत अबोल… प्रेम के चक्षु...
प्रेम कविता... प्रेम कविता…
#anil
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अधूरा इश्क़… दिल का बसंत …
प्रेम कविता… प्रेम कविता…
मुलाक़ात की बैचेनी… बैचेनी की साँस...
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धडकते धड़कन का एहसास… टेसू के फ़ूलों को शब्दों का साथ…
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लफ्जों का दायरा… खामोशी का कैनवास …
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सरिता का बहना… दिल के पन्नों पर चित्रकारी…
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नि:शब्द भाव… अतीत की यादगार तस्वीर…
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हर स्पंदन का स्वर… हर अंतर्मन का गीत…
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शब्दगंध… वर्षा की बूंदे…
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ग्रीष्म का इश्क मौसम … पतझड़ का प्यार…
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अक्षर सौंदर्य… भीड़ में एकांत…
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कविता का मर्म… कविता का रहस्य…
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चांदनी की मंद बयार… यादों का एक वृक्ष नायाब…
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ह्रदय की टहनी पर प्रेम का विश्वास … वफ़ा की वफ़ा
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प्रेम ऋतु का प्रेम पल्लव... चंद्रमा का शाश्वत प्रेम…
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अश्कों के अश्क… मुस्कराहट की मुस्कुराहट…
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वो कहता था कि मुझसे प्यार करता है,
और मैं चुपचाप उस पर यक़ीन करती रही...
मुझे क्या पता था,
जिसे मैं अपना समझ रही हूँ,
वही एक दिन मुझे इतना पराया कर देगा।
मेरे प्यार पर सवाल उठाए गए,
मेरी खामोशी को बेवफ़ाई कहा गया,
और जिस दिल ने उसे बिना कहे चाहा,
उसी दिल को चरित्रहीन कह दिया गया।
बहुत रोई हूँ मैं उन बातों पर,
जो शायद तुमने गुस्से में कह दी थीं...
पर तुम्हें क्या पता,
कुछ शब्द गुस्सा खत्म होने के बाद भी
दिल में हमेशा के लिए रह जाते हैं।
आज भी दर्द है,
क्योंकि प्यार मैंने भी किया था...
बस तुम्हारी तरह उसे जताना नहीं आया।
लेकिन अब एक बात समझ गई हूँ,
जो प्यार तुम्हें हर बार
अपने ही आत्मसम्मान के खिलाफ खड़ा कर दे,
वहाँ प्यार बचा भी हो,
तो खुद को बचाना ज़रूरी होता है।
इसलिए जा रही हूँ मैं,
तुमसे नफ़रत करके नहीं...
बस खुद को और टूटने से बचाने के लिए।
क्योंकि इस बार दर्द चाहे जितना हो,
मैं अपना आत्मसम्मान नहीं खोऊँगी।
#BidyaG
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और मैं चुपचाप उस पर यक़ीन करती रही...
मुझे क्या पता था,
जिसे मैं अपना समझ रही हूँ,
वही एक दिन मुझे इतना पराया कर देगा।
मेरे प्यार पर सवाल उठाए गए,
मेरी खामोशी को बेवफ़ाई कहा गया,
और जिस दिल ने उसे बिना कहे चाहा,
उसी दिल को चरित्रहीन कह दिया गया।
बहुत रोई हूँ मैं उन बातों पर,
जो शायद तुमने गुस्से में कह दी थीं...
पर तुम्हें क्या पता,
कुछ शब्द गुस्सा खत्म होने के बाद भी
दिल में हमेशा के लिए रह जाते हैं।
आज भी दर्द है,
क्योंकि प्यार मैंने भी किया था...
बस तुम्हारी तरह उसे जताना नहीं आया।
लेकिन अब एक बात समझ गई हूँ,
जो प्यार तुम्हें हर बार
अपने ही आत्मसम्मान के खिलाफ खड़ा कर दे,
वहाँ प्यार बचा भी हो,
तो खुद को बचाना ज़रूरी होता है।
इसलिए जा रही हूँ मैं,
तुमसे नफ़रत करके नहीं...
बस खुद को और टूटने से बचाने के लिए।
क्योंकि इस बार दर्द चाहे जितना हो,
मैं अपना आत्मसम्मान नहीं खोऊँगी।
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भागीरथी
भारत की स्पंदन हो तुम
ऋषियों की हर वंदन हो तुम
प्रकृति का क्रंदन हो तुम
और हर जीवन का अंकुरण हो तुम
अविरल होकर बहती हो
स्वच्छंद धरा पर बहती हो
भटके हुए जीवात्मा का
तुम ही तो उद्धार करती हो
गर्भ में तेरे पलते हैं
विनाश और संहार
उसी से तुम करती हो
प्रलय और निर्माण
निश्चल होकर बहो न गंगा
हर पल संहार करो ना गंगा
हे तरंगिणी है भवतारिणी
विनाश नहीं निर्माण करो
हे जग जननी हे भयहरिणी हे भवतरणी हे जगत्तरणी
याचना है तुमसे मेरी
विकराल रूप को त्याग कर
फिर निर्माण करो ना
आशीष कुमार सिंह
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भारत की स्पंदन हो तुम
ऋषियों की हर वंदन हो तुम
प्रकृति का क्रंदन हो तुम
और हर जीवन का अंकुरण हो तुम
अविरल होकर बहती हो
स्वच्छंद धरा पर बहती हो
भटके हुए जीवात्मा का
तुम ही तो उद्धार करती हो
गर्भ में तेरे पलते हैं
विनाश और संहार
उसी से तुम करती हो
प्रलय और निर्माण
निश्चल होकर बहो न गंगा
हर पल संहार करो ना गंगा
हे तरंगिणी है भवतारिणी
विनाश नहीं निर्माण करो
हे जग जननी हे भयहरिणी हे भवतरणी हे जगत्तरणी
याचना है तुमसे मेरी
विकराल रूप को त्याग कर
फिर निर्माण करो ना
आशीष कुमार सिंह
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अजीब था उसका प्यार भी...
वो कहता था कि मुझे खोने से डरता है,
फिर हर बार मुझे ही छोड़ जाता था।
वो कहता था कि मुझसे प्यार करता है,
फिर मेरे ही किरदार पर सवाल उठा देता था।
शायद प्यार करता था वो मुझसे,
मगर उसका प्यार बहुत अजीब था
वो मुझे अपना कहना चाहता था,
पर मुझे समझना कभी नहीं चाहता था।
#BidyaG
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वो कहता था कि मुझे खोने से डरता है,
फिर हर बार मुझे ही छोड़ जाता था।
वो कहता था कि मुझसे प्यार करता है,
फिर मेरे ही किरदार पर सवाल उठा देता था।
शायद प्यार करता था वो मुझसे,
मगर उसका प्यार बहुत अजीब था
वो मुझे अपना कहना चाहता था,
पर मुझे समझना कभी नहीं चाहता था।
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वो पहली बार आया,
मुझे तोड़कर चला गया...
फिर लौटा, तो मैंने सोचा
शायद इस बार मेरे ज़ख्मों को समझेगा,
मगर उसने फिर एक नया ज़ख्म दे दिया।
और अब तीसरी बार आया था,
मैंने फिर भी उसे अपना समझ लिया...
पर इस बार उसने मुझे इतना तोड़ा है,
कि शायद अब खुद को समेटने में बहुत वक्त लगेगा।
#BidyaG
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मुझे तोड़कर चला गया...
फिर लौटा, तो मैंने सोचा
शायद इस बार मेरे ज़ख्मों को समझेगा,
मगर उसने फिर एक नया ज़ख्म दे दिया।
और अब तीसरी बार आया था,
मैंने फिर भी उसे अपना समझ लिया...
पर इस बार उसने मुझे इतना तोड़ा है,
कि शायद अब खुद को समेटने में बहुत वक्त लगेगा।
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कभी-कभी इंसान अकेला रहना नहीं चाहता...
बस उसे कोई ऐसा नहीं मिलता,
जिसके सामने वो अपना दिल खोल सके।
वो भी पहले बहुत कोशिश करती थी...
लोगों को समझने की,
रिश्तों को बचाने की,
सबका साथ निभाने की...
लेकिन धीरे-धीरे
उसे समझ आने लगा कि
हर किसी को अपना समझ लेना,
सबसे बड़ी गलती होती है।
अब वो पहले जैसी नहीं रही...
अब वो कम बोलती है,
कम उम्मीद रखती है,
और लोगों से ज़्यादा
खुद के साथ रहना पसंद करती है।
हाँ, कभी-कभी रातों में
अकेलापन बहुत सताता है...
मन करता है कोई हो
जो बस इतना पूछे—
"तुम सच में ठीक हो ना?"
लेकिन फिर वो खुद को संभाल लेती है...
क्योंकि अब उसे पता है—
हर बार कोई और उसे संभालने नहीं आएगा।
इसलिए उसने सीख लिया है
खुद से लड़ना...
खुद को समझना...
और टूटकर भी
खुद को फिर से समेट लेना।
क्योंकि आखिर में...
जब सब चले जाते हैं,
तो इंसान के पास
वो खुद ही रह जाता है।
#BidyaG
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बस उसे कोई ऐसा नहीं मिलता,
जिसके सामने वो अपना दिल खोल सके।
वो भी पहले बहुत कोशिश करती थी...
लोगों को समझने की,
रिश्तों को बचाने की,
सबका साथ निभाने की...
लेकिन धीरे-धीरे
उसे समझ आने लगा कि
हर किसी को अपना समझ लेना,
सबसे बड़ी गलती होती है।
अब वो पहले जैसी नहीं रही...
अब वो कम बोलती है,
कम उम्मीद रखती है,
और लोगों से ज़्यादा
खुद के साथ रहना पसंद करती है।
हाँ, कभी-कभी रातों में
अकेलापन बहुत सताता है...
मन करता है कोई हो
जो बस इतना पूछे—
"तुम सच में ठीक हो ना?"
लेकिन फिर वो खुद को संभाल लेती है...
क्योंकि अब उसे पता है—
हर बार कोई और उसे संभालने नहीं आएगा।
इसलिए उसने सीख लिया है
खुद से लड़ना...
खुद को समझना...
और टूटकर भी
खुद को फिर से समेट लेना।
क्योंकि आखिर में...
जब सब चले जाते हैं,
तो इंसान के पास
वो खुद ही रह जाता है।
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अजीब दस्तूर है इस दुनिया का,
वफ़ादार यहाँ अक्सर रोते हैं,
जिन्हें मिलता है सच्चा दिल,
वही उसे सबसे ज़्यादा खोते हैं।
गद्दारों को वफ़ा मिल जाती है,
वफ़ादारों को धोखा मिलता है,
जो दिल से किसी को अपना माने,
उसी का दिल सबसे ज़्यादा टूटता है।
फिर वो खामोश रहना सीख जाते हैं,
और भरोसा करना भूल जाते हैं।
#BidyaG
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वफ़ादार यहाँ अक्सर रोते हैं,
जिन्हें मिलता है सच्चा दिल,
वही उसे सबसे ज़्यादा खोते हैं।
गद्दारों को वफ़ा मिल जाती है,
वफ़ादारों को धोखा मिलता है,
जो दिल से किसी को अपना माने,
उसी का दिल सबसे ज़्यादा टूटता है।
फिर वो खामोश रहना सीख जाते हैं,
और भरोसा करना भूल जाते हैं।
#BidyaG
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मुझे हैरत है...
आख़िर सदियों तक
घूँघट में जकड़ी,
चिताओं पर जलती,
अशिक्षित और दयनीय,
जौहर करतीं
स्त्रियों के लिए
क्यों नहीं आई कोई देवी?
क्यों केवल मंदिरों में
बैठी रही वो?
जबकि सबसे अधिक
शोषित
स्त्रियाँ ही थीं।
या पुरुष-प्रधान समाज में
इजाज़त नहीं थी
देवियों को
मंदिरों से बाहर आने की?
#bhagyashree
#review
4 sep 2026
🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
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आख़िर सदियों तक
घूँघट में जकड़ी,
चिताओं पर जलती,
अशिक्षित और दयनीय,
जौहर करतीं
स्त्रियों के लिए
क्यों नहीं आई कोई देवी?
क्यों केवल मंदिरों में
बैठी रही वो?
जबकि सबसे अधिक
शोषित
स्त्रियाँ ही थीं।
या पुरुष-प्रधान समाज में
इजाज़त नहीं थी
देवियों को
मंदिरों से बाहर आने की?
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4 sep 2026
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मैं खुद में मुकम्मल हूँ
तुम्हें लगता होगा मैं बोरिंग हूँ, क्योंकि मैं ज़्यादा नहीं बोलती,
पर मेरी ख़ामोशी के पीछे, खयालों की एक पूरी दुनिया बस्ती है।
मैं इंट्रोवर्ट हूँ, मुझे शोर से ज़्यादा सुकून प्यारा है,
मेरे पास हज़ारों दोस्त नहीं, पर मेरा खुद का साथ सबसे न्यारा है।
मुझे किसी की ज़रूरत नहीं, अपनी कमियाँ भरने के लिए,
मैं खुद में पूरी हूँ, खुद से ही बातें करने के लिए।
भीड़ का हिस्सा बनना मेरी फितरत में नहीं,
मैं वो किताब हूँ, जिसे समझने का हुनर हर किसी में नहीं।
#BidyaG
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🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
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तुम्हें लगता होगा मैं बोरिंग हूँ, क्योंकि मैं ज़्यादा नहीं बोलती,
पर मेरी ख़ामोशी के पीछे, खयालों की एक पूरी दुनिया बस्ती है।
मैं इंट्रोवर्ट हूँ, मुझे शोर से ज़्यादा सुकून प्यारा है,
मेरे पास हज़ारों दोस्त नहीं, पर मेरा खुद का साथ सबसे न्यारा है।
मुझे किसी की ज़रूरत नहीं, अपनी कमियाँ भरने के लिए,
मैं खुद में पूरी हूँ, खुद से ही बातें करने के लिए।
भीड़ का हिस्सा बनना मेरी फितरत में नहीं,
मैं वो किताब हूँ, जिसे समझने का हुनर हर किसी में नहीं।
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🔗 View | ✨𝗕𝗢𝗢𝗦𝗧✨
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