मैं अपने अकेलेपन में किसी को
ढुंढ रहीं थीं...
भटक रहीं थीं...
कोई अपना हो जिस अपना कहूं ऐसा
तलाश रहीं थीं...
इन्तजार कर रही है...
थक गई मैं.. तरश गई आंखे..
पर कोई नहीं मिला मुझे मेरे जैसा...
मिला तो सिर्फ छल,कपट और फरेब
#sangeetasalvi
#review
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ढुंढ रहीं थीं...
भटक रहीं थीं...
कोई अपना हो जिस अपना कहूं ऐसा
तलाश रहीं थीं...
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पर कोई नहीं मिला मुझे मेरे जैसा...
मिला तो सिर्फ छल,कपट और फरेब
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❤8
..
मन को मुबारक एक शाम और ढल गई!
मन को मुबारक एक शाम और ढल गई!
लहलहाती– सिममसिमाती और एक साल झल गई,
शुरू पढ़ाई और जीवन को balance की सिसकियों
से हुई थी जो!
शायद ग़म और खुशी की कोलाहल में, यह भी ढल गई।
रहमत करे तो जीवन किसपे,
सारी सिसकियाँ किसी झोले में डालकर गंगा में
बह गई।
हाँ, मन को मुबारक एक शाम और ढल गई,
नई रूप में दुनिया सिखाती है, समझाती है,
रिश्ता रखकर अपना बनाती है,
कहते हैं इसे:- बस अपनी जिंदगी किसी और के
यहाँ रह गई।
जाना जमाना को शक था किसी हसीन मंजर का,
जो थी किसी उल्फ़त में , जाने वह भी किसी
ठिठोली-सी कह गई।
मन को मुबारक एक शाम और ढल गई।
खिलता-खिलाता — सुना पड़ा है मुखा की रौनक
मानो जैसे सिमटते हुए थोड़ी मुस्कान दब कर
रह गई।
खुली छूट पाकर फिर से समझदार जीभ भी कह गई,
लो तुम्हारे तीरंदाजी की आखिरी तीर से समस्या हल हुई,
मन को मुबारक एक और शाम ढल गई।
#Suman
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मन को मुबारक एक शाम और ढल गई!
मन को मुबारक एक शाम और ढल गई!
लहलहाती– सिममसिमाती और एक साल झल गई,
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से हुई थी जो!
शायद ग़म और खुशी की कोलाहल में, यह भी ढल गई।
रहमत करे तो जीवन किसपे,
सारी सिसकियाँ किसी झोले में डालकर गंगा में
बह गई।
हाँ, मन को मुबारक एक शाम और ढल गई,
नई रूप में दुनिया सिखाती है, समझाती है,
रिश्ता रखकर अपना बनाती है,
कहते हैं इसे:- बस अपनी जिंदगी किसी और के
यहाँ रह गई।
जाना जमाना को शक था किसी हसीन मंजर का,
जो थी किसी उल्फ़त में , जाने वह भी किसी
ठिठोली-सी कह गई।
मन को मुबारक एक शाम और ढल गई।
खिलता-खिलाता — सुना पड़ा है मुखा की रौनक
मानो जैसे सिमटते हुए थोड़ी मुस्कान दब कर
रह गई।
खुली छूट पाकर फिर से समझदार जीभ भी कह गई,
लो तुम्हारे तीरंदाजी की आखिरी तीर से समस्या हल हुई,
मन को मुबारक एक और शाम ढल गई।
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❤3👍1
किसी ने हमसे पूछा,
प्यार के बाद हाल कैसा होता है?
हमने कहां जब तक याद रहे,
तो बेहाल होता है।
समय बित जाने के बाद,
एक कहानी का किरदार होता है।
आते-जाते मौसम कि तरह
ये लोग बदल जाते हैं।
व्यक्ति वही रहता है।
बस उसके यार बदल जाते हैं।
#review
#arjunthakur
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व्यक्ति वही रहता है।
बस उसके यार बदल जाते हैं।
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❤2
सब लोग कृपया दो hashtag # लगाएं
1. #review
2. अपनी लिखी कविता पे अपने नाम का hashtag # लगाइये, जैसे #yourname
किसी और की कविता share करते हैं और उसका नाम नहीं जानते तो #unknown लगाइए
#review आपके पोस्ट को @HindiPoems में भी साझा करता है, जो कि समूह का चैनल है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आपकी रचना को अधिक पाठक मिल सकें और एक ऐसा स्थान बना रहे जहाँ केवल कविता ही साझा की जाए, न कि चर्चाएँ।
#yourname बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रचना आपके द्वारा लिखी गई है। यदि आप किसी और की कविता साझा कर रहे हैं, तो उनके नाम को हैशटैग में ज़रूर लिखें या यदि लेखक का नाम ज्ञात न हो तो #unknown का उपयोग करें।
इसके अलावा #yourname से यह भी आसानी होती है कि समूह/चैनल में आपकी सभी कविताएँ एक साथ खोजी जा सकें। क्यों? ताकि कोई भी व्यक्ति, यहाँ तक कि आप स्वयं भी, उस हैशटैग पर क्लिक करके आपकी पहले साझा की गई सभी कविताएँ पढ़ सके।
#review shares your post in @HindiPoems too which is group's channel. This is done to ensure you get more readership and also a place where only poetry goes in and not any discussions.
#yourname is important so that you claim your write-up that it's written by you. If in case you are sharing other's poetry then you must use their name in hashtag or #unknown in case you don't know who has written it.
Also #yourname makes it easier to find all your poems in group/channel at once. Why? So that someone including you can click on that hashtag and read all of your previous poetry that you shared.
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#yourname बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रचना आपके द्वारा लिखी गई है। यदि आप किसी और की कविता साझा कर रहे हैं, तो उनके नाम को हैशटैग में ज़रूर लिखें या यदि लेखक का नाम ज्ञात न हो तो #unknown का उपयोग करें।
इसके अलावा #yourname से यह भी आसानी होती है कि समूह/चैनल में आपकी सभी कविताएँ एक साथ खोजी जा सकें। क्यों? ताकि कोई भी व्यक्ति, यहाँ तक कि आप स्वयं भी, उस हैशटैग पर क्लिक करके आपकी पहले साझा की गई सभी कविताएँ पढ़ सके।
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