तुम आज मुझे खोकर तड़प रहे हो,
कल मेरे भरोसे को तोड़कर कहाँ थे?
मैंने तो तुम्हें बस दोस्त माना था,
तुमने ही मोहब्बत का ख़्वाब सजाया था।
आज तुम्हें मेरी यादें रुलाती हैं,
कल तुम्हारे झूठ ने मेरी आँखें भिगोई थीं।
तुम्हें चाहना मेरे बस में नहीं था,
पर तुम्हें यूँ टूटते देखना भी अच्छा नहीं लगता।
काश, तुमने मुझे झूठ से नहीं, सच से जीता होता,
तो शायद हमारा रिश्ता कुछ और होता।
अब मेरी याद में ख़ुद को सज़ा मत देना,
मैं तुम्हारी नहीं हूँ…
पर ख़ुद से तो मुँह मत मोड़ लेना।
#BidyaG
#review
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कल मेरे भरोसे को तोड़कर कहाँ थे?
मैंने तो तुम्हें बस दोस्त माना था,
तुमने ही मोहब्बत का ख़्वाब सजाया था।
आज तुम्हें मेरी यादें रुलाती हैं,
कल तुम्हारे झूठ ने मेरी आँखें भिगोई थीं।
तुम्हें चाहना मेरे बस में नहीं था,
पर तुम्हें यूँ टूटते देखना भी अच्छा नहीं लगता।
काश, तुमने मुझे झूठ से नहीं, सच से जीता होता,
तो शायद हमारा रिश्ता कुछ और होता।
अब मेरी याद में ख़ुद को सज़ा मत देना,
मैं तुम्हारी नहीं हूँ…
पर ख़ुद से तो मुँह मत मोड़ लेना।
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इश्क़, खुशियाँ, ख्वाहिशें सब तेरे साथ ही चले गए,
अब जो बची है ज़िंदगी, वो महज़ बाकी की कहानी है।
#Bhagyashree
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17 aug 2025
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अब जो बची है ज़िंदगी, वो महज़ बाकी की कहानी है।
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17 aug 2025
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❤4
💔 कुछ लोग दिल में उतरकर भी हमारे नहीं होते,
जिनके लिए हम रोते हैं, वो हमारे लिए नहीं रोते। 🥀
#arjunthakur
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जिनके लिए हम रोते हैं, वो हमारे लिए नहीं रोते। 🥀
#arjunthakur
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❤1
💔 कुछ लोग दिल में उतरकर भी हमारे नहीं होते,
जिनके लिए हम रोते हैं, वो हमारे लिए नहीं रोते। 🥀
जिनकी खुशी के लिए हम खुद को भुला बैठे,
वो हमारी हँसी को भी एक दिन भुला बैठे। 🖤
हमने तो हर दुआ में बस उनका नाम माँगा,
उन्होंने हमें छोड़कर किसी और का साथ माँगा। 💔
अब शिकायत भी क्या करें उस बेवफ़ा से,
जब अपना ही दिल हार गए उसकी वफ़ा से। 🥀
#arjunthakur
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जिनके लिए हम रोते हैं, वो हमारे लिए नहीं रोते। 🥀
जिनकी खुशी के लिए हम खुद को भुला बैठे,
वो हमारी हँसी को भी एक दिन भुला बैठे। 🖤
हमने तो हर दुआ में बस उनका नाम माँगा,
उन्होंने हमें छोड़कर किसी और का साथ माँगा। 💔
अब शिकायत भी क्या करें उस बेवफ़ा से,
जब अपना ही दिल हार गए उसकी वफ़ा से। 🥀
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❤3
हम उस दौर में जीते जाते हैं
जिस दौर में जीना.. मरना है।
हम उस दरिया का पानी पीते हैं
जिस दरिया में ज़हर पनपता है।
वो किताबें हमको प्यारी हैं
जिनको कोई दीमक खाता है।
उस घर के हम निवासी हैं
जो मलबे से बनता जाता है।
हम उस दौर में हँसते जाते हैं
जिस दौर में हँसना.. मरना है।
उन सड़कों पर हम गीत गाते हैं
जिनमें कोई बेबस मारा जाता है।
हमको वतन-ए-ख़ुश्बू प्यारी है
पर कोई पेड़ों को काटे जाता है।
हमको ख़ामोशी बड़ी भाती है
हमारा हुक्मरान जो रूठ जाता है।
हम उस दौर में लिखते जाते हैं
जिस दौर में लिखना.. मरना है।
हम उन आँखों में सपने रखते हैं
जिन आँखों को चुराया जाता है।
हमको वो ग़ज़लें प्यारी हैं
जिनमें इंक़लाब गाया जाता है।
हमको तब सच्चाई भाती है
जब झूठ कोई सुनाता जाता है।
हम उस दौर में जीते जाते हैं
जिस दौर में जीना.. मरना है।
#Bhagyashree
#review
7 sep 2026
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जिस दौर में जीना.. मरना है।
हम उस दरिया का पानी पीते हैं
जिस दरिया में ज़हर पनपता है।
वो किताबें हमको प्यारी हैं
जिनको कोई दीमक खाता है।
उस घर के हम निवासी हैं
जो मलबे से बनता जाता है।
हम उस दौर में हँसते जाते हैं
जिस दौर में हँसना.. मरना है।
उन सड़कों पर हम गीत गाते हैं
जिनमें कोई बेबस मारा जाता है।
हमको वतन-ए-ख़ुश्बू प्यारी है
पर कोई पेड़ों को काटे जाता है।
हमको ख़ामोशी बड़ी भाती है
हमारा हुक्मरान जो रूठ जाता है।
हम उस दौर में लिखते जाते हैं
जिस दौर में लिखना.. मरना है।
हम उन आँखों में सपने रखते हैं
जिन आँखों को चुराया जाता है।
हमको वो ग़ज़लें प्यारी हैं
जिनमें इंक़लाब गाया जाता है।
हमको तब सच्चाई भाती है
जब झूठ कोई सुनाता जाता है।
हम उस दौर में जीते जाते हैं
जिस दौर में जीना.. मरना है।
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7 sep 2026
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❤3👍1
साथ हम …
साथ हम …
फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?
साथ हम …
फिर भी ये तकरार क्यों?
साथ हम …
फिर अश्कों के मौसम में दोनों तन्हा क्यों?
साथ हम …
दो बादल, दो रास्ते, एहसास एक नहीं क्यों?
साथ हम …
एक ही सवाल, एक ही जवाब, फिर भी ये मुश्किलों की परछाई क्यों?
साथ हम …
नाज़ुक दिलों की किताब में सब पन्ने कोरे क्यों?
साथ हम …
फिर भी चुपके से दूरी बढ़ती जा रही क्यों?
साथ हम …
फिर भी मन की राहों में बार-बार मुड़ कर रुकना क्यों?
साथ हम …
फिर भी बातचीत का सिलसिला अचानक थम सा गया क्यों?
हम साथ …
फिर भी हम हमेशा खामोशी में क्यों?
हम साथ …
फिर भी हर लम्हा बेकरार,बेबस क्यों?
हम साथ …
फिर भी दो शहर भीग रहे है धूप की रोशनी में क्यों?
साथ हम …
फिर भी सुकून की पलकों में सितारों की छुपी सिसकियाँ क्यों?
साथ हम …
फिर अब तक प्रेम के पेड़ की पत्तियों में मौन हुई रुसवाई क्यों?
साथ हम…
फिर भी काग़ज़ की धडकन में तेज तूफ़ान की हलचल क्यों?
साथ हम…
चाहत की कलम से जुड़े दो किनारे दूर जा रहे क्यों?
साथ हम…
फिर भी वादों की वादियों में सुकून का रास्ता काग़ज़ का बनाया जा रहा क्यों?
हम साथ…
फिर भी ये एक कहानी बेरुखी की क्यों?
हम साथ…
फिर भी एक भंवर लफ्जों के साथ- साथ इतना गहरा बन जाता क्यों?
साथ हम…
फिर भी दो अक्स ,एक मंज़िल,बहारों की बारिश में पल-पल रुखापन क्यों?
साथ हम…
फिर भी ओस की बूँद में कोई नई बात नहीं क्यों?
हम साथ…
फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?
#anil
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साथ हम …
फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?
साथ हम …
फिर भी ये तकरार क्यों?
साथ हम …
फिर अश्कों के मौसम में दोनों तन्हा क्यों?
साथ हम …
दो बादल, दो रास्ते, एहसास एक नहीं क्यों?
साथ हम …
एक ही सवाल, एक ही जवाब, फिर भी ये मुश्किलों की परछाई क्यों?
साथ हम …
नाज़ुक दिलों की किताब में सब पन्ने कोरे क्यों?
साथ हम …
फिर भी चुपके से दूरी बढ़ती जा रही क्यों?
साथ हम …
फिर भी मन की राहों में बार-बार मुड़ कर रुकना क्यों?
साथ हम …
फिर भी बातचीत का सिलसिला अचानक थम सा गया क्यों?
हम साथ …
फिर भी हम हमेशा खामोशी में क्यों?
हम साथ …
फिर भी हर लम्हा बेकरार,बेबस क्यों?
हम साथ …
फिर भी दो शहर भीग रहे है धूप की रोशनी में क्यों?
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फिर भी सुकून की पलकों में सितारों की छुपी सिसकियाँ क्यों?
साथ हम …
फिर अब तक प्रेम के पेड़ की पत्तियों में मौन हुई रुसवाई क्यों?
साथ हम…
फिर भी काग़ज़ की धडकन में तेज तूफ़ान की हलचल क्यों?
साथ हम…
चाहत की कलम से जुड़े दो किनारे दूर जा रहे क्यों?
साथ हम…
फिर भी वादों की वादियों में सुकून का रास्ता काग़ज़ का बनाया जा रहा क्यों?
हम साथ…
फिर भी ये एक कहानी बेरुखी की क्यों?
हम साथ…
फिर भी एक भंवर लफ्जों के साथ- साथ इतना गहरा बन जाता क्यों?
साथ हम…
फिर भी दो अक्स ,एक मंज़िल,बहारों की बारिश में पल-पल रुखापन क्यों?
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फिर भी ओस की बूँद में कोई नई बात नहीं क्यों?
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फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?
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