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कक्षा 10वीं की किताब में लिखे
✨[ मेवाड़ के शासकों का कालक्रम 👇🏻]
1. बप्पा रावल (734 - 753 ई.)
2. जैत्रसिंह (1213 - 1253 ई.)
3. रतन सिंह (1302 - 1303 ई.)
4. राणा हम्मीर (1326 - 1364 ई.)
5. महाराणा लाखा (1382 - 1421 ई.)
6. महाराणा मोकल (1421 - 1433 ई.)
7. महाराणा कुम्भा (1433 - 1468 ई.)
8. राणा सांगा (1509 - 1528 ई.)
9. राणा उदयसिंह (1537 - 1572 ई.)
10. महाराणा प्रताप (1572 - 1597 ई.)
11. राणा अमरसिंह (1597 - 1620 ई.)
12. महाराणा राजसिंह (1652 - 1680 ई.)
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[ कक्षा 10वीं की किताब में लिखे ]
✨मारवाड़ के शासकों का कालक्रम 👇🏻
1. राव चूड़ा (1394-1423 ई.)
2. राव रणमल (1427-1438 ई.)
3. राव जोधा (1438-1489 ई.)
4. राव मालदेव (1531-1562 ई.)
5. राव चंद्रसेन (1562-1581 ई.)
6. मोटा राजा उदयसिंह (1583-1595 ई.)
7.महाराजा जसवंत सिंह प्रथम 1638-1676 ई.
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✅भारत और म्यांमार ने पहली त्रि-सेवा संयुक्त एचएडीआर अभ्यास ‘राहत मित्र’ की शुरुआत की
👉भारत और म्यांमार ने 5 नवंबर 2026 को चेन्नई में पहली द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सैन्य अभ्यास ‘राहत मित्र’ की शुरुआत की। यह अभ्यास 5 से 6 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है।
👉'टुगेदर फॉर ह्यूमैनिटी, स्ट्रॉन्गर थ्रू पार्टनरशिप ' थीम पर आधारित इस अभ्यास का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है।
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👉'टुगेदर फॉर ह्यूमैनिटी, स्ट्रॉन्गर थ्रू पार्टनरशिप ' थीम पर आधारित इस अभ्यास का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है।
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✅अंडमान और निकोबार कमान में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफलतापूर्वक समापन
👉पहला बिमस्तिक समुद्री सुरक्षा अभ्यास 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक श्री विजय पुरम में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
👉अंडमान और निकोबार कमान द्वारा आयोजित इस अभ्यास में भारत, म्यांमार और श्रीलंका के नौसैनिक जहाजों ने भाग लिया।
👉इस आयोजन ने क्षेत्रीय समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत किया, जिससे बांग्लादेश की खाड़ी में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
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👉अंडमान और निकोबार कमान द्वारा आयोजित इस अभ्यास में भारत, म्यांमार और श्रीलंका के नौसैनिक जहाजों ने भाग लिया।
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“रमन प्रभाव (Raman Effect)”
'भारत रत्न' से सम्मानित, महान वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) पर अपने शोध से “रमन प्रभाव (Raman Effect)” की खोज की, जिसने भौतिकी की दिशा ही बदल दी।
रमन प्रभाव बताता है कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे पानी, कांच) से गुजरता है, तो उसका एक छोटा हिस्सा अपनी राह बदलते हुए विभिन्न वेवलेंथ्स (तरंगदैर्ध्य) में बिखर जाता है, जिसे रमन स्कैटरिंग कहा जाता है।
रमन प्रभाव का प्रयोग पदार्थों की संरचना, रसायन और बायोलॉजी में गहन अध्ययन के लिए होता है।
यह खोज 28 फरवरी 1928 को हुई और इस योगदान के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
वे विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल प्राप्त करने वाले पहले एशियाई व पहले भारतीय वैज्ञानिक बने।
इसी खोज की स्मृति में भारत में 28 फरवरी को 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मनाया जाता है।
'भारत रत्न' से सम्मानित, महान वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) पर अपने शोध से “रमन प्रभाव (Raman Effect)” की खोज की, जिसने भौतिकी की दिशा ही बदल दी।
रमन प्रभाव बताता है कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे पानी, कांच) से गुजरता है, तो उसका एक छोटा हिस्सा अपनी राह बदलते हुए विभिन्न वेवलेंथ्स (तरंगदैर्ध्य) में बिखर जाता है, जिसे रमन स्कैटरिंग कहा जाता है।
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CET spacial 💯🔥
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