Taiyari Karlo (Rajasthan)
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देकची मार / बाल्टी मार होली कहाँ की प्रसिद्ध है
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26%
नाथद्वारा
43%
ब्यावर
23%
बीकानेर
8%
नागौर
गजसिंह को 'दलथम्बन' की उपाधि किस मुगल शासक ने दी थी
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19%
शाहजंहा
46%
जहांगीर
19%
अकबर
16%
औरंगजेब
राणीसर और पद्मसागर जलाशय किस दुर्ग में स्थित है
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17%
कुंभलगढ़ दुर्ग
47%
चितौड़गढ़ दुर्ग
26%
मेहरानगढ़ दुर्ग
10%
तारागढ़ दुर्ग (अजमेर)
राजस्थान की चित्र शैलियां (पार्ट-1)

राजस्थान की चित्रकला शैली पर गुजरात तथा कश्मीर की शैलियों का प्रभाव रहा है।

राजस्थानी चित्रकला के विषय
1. पशु-पक्षियों का चित्रण 2. शिकारी दृश्य 3. दरबार के दृश्य 4. नारी सौन्दर्य 5. धार्मिक ग्रन्थों का चित्रण आदि

राजस्थानी चित्रकला शैलियों की मूल शैली मेवाड़ शैली है।

सर्वप्रथम आनन्द कुमार स्वामी ने सन् 1916 ई. में अपनी पुस्तक "राजपुताना पेन्टिग्स" में राजस्थानी चित्रकला का वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।
भौगौलिक आधार पर राजस्थानी चित्रकला शैली को चार भागों में बांटा गया है। जिन्हें स्कूलस कहा जाता है।

1.मेवाड़ स्कूल:- उदयपुर शैली, नाथद्वारा शैली, चावण्ड शैली, देवगढ़ शैली, शाहपुरा, शैली।

2.मारवाड़ स्कूल:- जोधपुर शैली, बीकानेर शैली जैसलमेर शैली, नागौर शैली, किशनगढ़ शैली।

3.ढुढाड़ स्कूल:- जयपुर शैली, आमेर शैली, उनियारा शैली, शेखावटी शैली, अलवर शैली।

4.हाडौती स्कूल:- कोटा शैली, बुंदी शैली, झालावाड़ शैली।

शैलियों की पृष्ठभूमि का रंग
हरा - जयपुर की अलवर शैली

गुलाबी/श्वेत - किशनगढ शैली

नीला - कोटा शैली

सुनहरी - बूंदी शैली

पीला - जोधपुर व बीकानेर शैली

लाल - मेवाड़ शैली

पशु तथा पक्षी
हाथी व चकोर - मेवाड़ शैली

चील/कौआ व ऊंठ - जोधपुर तथा बीकानेर शैली

हिरण/शेर व बत्तख - कोटा तथा बूंदी शैली

अश्व व मोर:- जयपुर व अलवर शैली

गाय व मोर - नाथद्वारा शैली

वृक्ष
पीपल/बरगद - जयपुर तथा अलवर शैली

खजूर - कोटा तथा बूंदी शैली

आम - जोधपुर तथा बीकानेर शैली

कदम्ब - मेवाड़ शैली

केला - नाथद्वारा शैली

नयन/आंखे
खंजर समान - बीकानेर शैली

मृग समान - मेवाड शैली

आम्र पर्ण - कोटा व बूंदी शैली

मीन कृत:- जयपुर व अलवर शैली

कमान जैसी - किशनगढ़ शैली

बादाम जैसी - जोधपुर शैली

1. मेवाड़ स्कूल
उदयपुर शैली
राजस्थानी चित्रकला की मूल शैली है।

शैली का प्रारम्भिक विकास कुम्भा के काल में हुआ।

शैली का स्वर्णकाल जगत सिंह प्रथम का काल रहा।

महाराणा जगत सिंह के समय उदयपुर के राजमहलों में "चितेरोंरी ओवरी" नामक कला विद्यालय खोला गया जिसे "तस्वीरों रो कारखानों "भी कहा जाता है।

विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतन्त्र नामक ग्रन्थ में पशु-पक्षियों की कहानियों के माध्यम से मानव जीवन के सिद्वान्तों को समझाया गया है।

पंचतन्त्र का फारसी अनुवाद "कलिला दमना" है, जो एक रूपात्मक कहानी है। इसमें राजा तथा उसके दो मंत्रियों कलिता व दमना का वर्णन किया गया है।

उदयपुर शैली में कलिला और दमना नाम से चित्र चित्रित किए गए थे।

सन 1260-61 ई. में मेवाड़ के महाराणा तेजसिंह के काल में इस शैली का प्रारम्भिक चित्र श्रावक प्रतिकर्मण सूत्र चूर्णि आहड़ में चित्रित किया गया। जिसका चित्रकार कमलचंद था।

सन् 1423 ई. में महाराणा मोकल के समय सुपासनह चरियम नामक चित्र चित्रकार हिरानंद के द्वारा चित्रित किया गया।

प्रमुख चित्रकार - मनोहर लाल, साहिबदीन (महाराणा जगत सिंह -प्रथम के दरबारी चित्रकार) कृपा राम, अमरा आदि।

चित्रित ग्रन्थ - 1. आर्श रामायण - मनोहर व साहिबदीन द्वारा। 2. गीत गोविन्द - साहबदीन द्वारा।

चित्रित विषय -मेवाड़ चित्रकला शैली में धार्मिक विषयों का चित्रण किया गया।

इस शैली में रामायण, महाभारत, रसिक प्रिया, गीत गोविन्द इत्यादि ग्रन्थों पर चित्र बनाए गए। मेवाड़ चित्रकला शैली पर गुर्जर तथा जैन शैली का प्रभाव रहा है।

नाथ द्वारा शैली
नाथ द्वारा मेवाड़ रियासत के अन्र्तगत आता था, जो वर्तमान में राजसमंद जिले में स्थित है।

यहां स्थित श्री नाथ जी मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महाराजा राजसिंह न 1671-72 में करवाया था।

यह मंदिर पिछवाई कला के लिए प्रसिद्ध है, जो वास्तव में नाथद्वारा शैली का रूप है।

इस चित्रकला शैली का विकास मथुरा के कलाकारों द्वारा किया गया।

महाराजा राजसिंह का काल इस शैली का स्वर्ण काल कहलाता है।

चित्रित विषय - श्री कृष्ण की बाल लीलाऐं, गतालों का चित्रण, यमुना स्नान, अन्नकूट महोत्सव आदि।

चित्रकार - खेतदान, घासीराम आदि।

देवगढ़ शैली
इस शैली का प्रारम्भिक विकास महाराजा द्वाारिकादास चुडावत के समय हुआ।

इस शैली को प्रसिद्धी दिलाने का श्रेय डाॅ. श्रीधर अंधारे को है।

चित्रकार - बगला, कंवला, चीखा/चोखा, बैजनाथ आदि।

शाहपुरा शैली
यह शैली भीलवाडा जिले के शाहपुरा कस्बे में विकसित हुई।

शाहपुरा की प्रसिद्ध कला फडु चित्रांकन में इस चित्रकला शैली का प्रयोग किया जाता है।

फड़ चित्रांकन में यहां का जोशी परिवार लगा हुआ है।

श्री लाल जोशी, दुर्गादास जोशी, पार्वती जोशी (पहली महिला फड़ चित्रकार) आदि

चित्र - हाथी व घोड़ों का संघर्ष (चित्रकास्ताजू)

चावण्ड शैली

इस शैली का प्रारम्भिक विकास महाराणा प्रताप के काल में हुआ।

स्वर्णकाल -अमरसिंह प्रथम का काल माना जाता है।

चित्रकार - जीसारदीन इस शैली का चित्रकार हैं

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29 मार्च के Test का शेड्यूल

ये Test 29 March शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......


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"होली का आध्यात्मिक रहस्य"

भारत में अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं उनमें से 'होली' का पवित्र त्यौहार बहुत उमंग उत्साह और खुशियों से मनाया जाता है। उसमें होली जलाते , एक दूसरे से मंगल मिलन मनाते हुए मुंख मीठा करते हैं। एक दूसरे को रंग लगाते हुए होली मनाते है।

होली माना- हो गई। बीती सो बीती। और दूसरा होली माना- पवित्र। हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाए और परिस्थितियां आती है।उनके चिंतन से हम स्वयं दुखी और परेशान रहते है। कई बार हमारे बातों से या व्यवहार से दूसरे लोग भी दुखी और परेशान होते है। इन पुरानी बातों को बीती सो बीती! माना बिंदी लगाकर स्टॉप करने से पुरानी बातों को भूल कर अच्छे,और शुभ भावना वाले श्रेष्ठ विचार मन में लाकर फिर से हम पुनः खुशियों से आनंद से जीवन जी सकते हैं।

होली रात्रि को जलाते हैं। इस कलयुग के अज्ञान रूपी अंधकार की रात्री में हम मनुष्य आत्माएं देह भान में आकर काम ,क्रोध, लोभ, मोह ,और अहंकार के वश होकर, कर्म कर रहे हैं इसलिए लड़ाई झगड़े, कर्मभोग और बीमारी के कारण मनुष्य जीवन दु:खी अशांत हो चुका है। ऐसे समय पर हम मनुष्य आत्माओं के पिता परमात्मा शिव, सृष्टि के रचयिता इस धरती पर आकर ! हमें आत्मा का और परमात्मा का सत्य परिचय देकर सृष्टि चक्र का ज्ञान देकर, राजयोग सिखलाते हैं।


योग अग्नि से हमारे अंदर कि बुराई और असुरी संस्कार भस्म कर परमात्मा पिता के साथ हम मंगल मिलन मनाते हैं। जिससे आत्मा पवित्र और शुद्ध बनने से खुशी, आनंद और सुख मिलता है। इसका यादगार होली जलाकर एक दूसरे से खुशियों से मिलन मनाते है।

होली जलाने के बाद रंग लगाते हैं। इस कलयुग में हम आत्मा यह शरीर रूपी वस्त्र के संग के कारण कर्मेंद्रियों के अधीन होकर कर्म करती है इसलिए मनुष्य आत्माएं दुखी और अशांत हो गए हैं। हम मनुष्य आत्माओं को परमात्मा पिता ने आकर ज्ञान का रंग आत्मा को लगाया जिससे आत्मा के अंदर पवित्रता, सुख, शांति ,प्रेम ,आनंद और शक्ति यह आत्मा के ओरिजिनल गुणों का, अविनाशी पक्का रंग लगया। जिससे मनुष्य आत्मा के जीवन में अवगुण बुराई रूपी रंग मिट गया। और परमात्मा की याद के संग से आत्मा दिव्य गुणों से रंग गई। और मुख से सदैव ज्ञान के मधुर मीठे बोल, बोलते हैं। इसका यादगार होली में रंग लगाते और मुख मीठा कर है।

होली के त्यौहार में ,श्री कृष्ण और गोप गोपियों को रास-लीला और रंग खेलते हुए दिखाते हैं। क्योंकि इस संगम युग में साधारण रूप में आए हुए गोपी वल्लभ ,परमात्मा शिव मुरली का ज्ञान, हम गोप गोपियों को सुना कर आत्मा को संपूर्ण पावन बनते है और अतींद्रिय सुखों का रास कराते है। अपने जीवन से अवगुण बुराइयों को निकाल कर मनुष्य से देवता बनकर सुख शांति पवित्रता प्रेम की नई दुनिया में नए युग में राज्य देते है।

इसलिए यादगार में होली के बाद नये साल की शुरुआत दिखाते है।
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Taiyari Karlo (Rajasthan) pinned «होली स्पेशल राजस्थान इतिहास की क्लास अजय सर द्वारा आज शाम 7 बजे होगी। VIDEO LINK:-https://youtu.be/HQVUhNV-SdY»
30 मार्च के Test का शेड्यूल

ये Test 30 March शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......


जिन भी विद्यार्थियों ने यह ... टेस्ट सीरीज नहीं ली है वह ले ले... यह टेस्ट सीरीज पूरे 5 महीने चलने वाली है.. इसमें आप का संपूर्ण पाठ्यक्रम बहुत अच्छे तरीके से कवर हो जाएगा

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प्रमुख नदियां एवं उनकी सहायक नदियां
═══════════════════════

❀【गंगा】
1. गोमती 2. घाघरा 3. गंडक 4. कोसी 5. यमुना 6. सोन 7. रामगन्गा

❀【यमुना】
1. चंबल 2. सिंध 3. बेतवा 4. केन 5. टोंस 6. हिन्डन

❀【गोदावरी】
1. इंद्रावती 2. मंजिरा 3. बिन्दुसार 4. सरबरी 5. पेनगंगा 6.प्राणहिता

❀【कृष्णा】
1. तुंगभद्रा 2. घटप्रभा 3. मालाप्रभा 4. भीम 5. वेदावती 6. कोयना

❀【कावेरी】
1. काबिनी 2. हेमावती 3.सिम्शा 4. अर्कावती 5. भवानी

❀【नर्मदा】
1. अमरावती 2. भुखी 3. तवा 4. बंगेर

❀【सिंधु】
1. सतलुज 2. द्रास 3. जांस्कर 4. श्योक 5.गिल्गिट 6. सुरु

❀【ब्रह्मपुत्र】
1. दिबांग 2. लोहित 3. जिया भोरेली (कामेंग) 4. दिखौव 5. सुबानसिरी मानस

❀【दामोदर】
1. बराकर 2. कोनार

❀【रवि】
1. बुधिल 2. नई या धोना 3. सिउल 4. ऊझ

❀【महानंदी】
1. सिवनाथ 2. हसदेव 3. जोंक 4. मंड 5. इब 6. ओंग 7. तेल

❀【चम्बल】
1. बानस 2. कालि सिंध 3. शीप्रा 4. पार्बती 5. मे
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राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं

►1904 भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित

►1905 बंगाल का विभाजन

►1906 मुस्लिम लीग की स्थापना

►1907 सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट

►1909 मार्ले-मिंटो सुधार

►1911 ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार

►1916 होमरूल लीग का निर्माण

►1916 मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)

►1917 महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन

►1919 रौलेट अधिनियम

►1919 जलियाँवाला बाग हत्याकांड

►1919 मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार

►1920 खिलाफत आंदोलन

►1920 असहयोग आंदोलन

►1922 चौरी-चौरा कांड

►1927 साइमन कमीशन की नियुक्ति

►1928 साइमन कमीशन का भारत आगमन

►1929 भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट

►1929 कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग

►1930 सविनय अवज्ञा आंदोलन

►1930 प्रथम गोलमेज सम्मेलन

►1931 द्वितीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 तृतीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा

►1932 पूना पैक्ट

►1942 भारत छोड़ो आंदोलन

►1942 क्रिप्स मिशन का आगमन

►1943 आजाद हिन्द फौज की स्थापना

►1946 कैबिनेट मिशन का आगमन

►1946 भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन

►1946 अंतरिम सरकार की स्थापना

►1947 भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना

►1947 भारतीय स्वतंत्रता प्राप्तिराष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं

►1904 भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित

►1905 बंगाल का विभाजन

►1906 मुस्लिम लीग की स्थापना

►1907 सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट

►1909 मार्ले-मिंटो सुधार

►1911 ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार

►1916 होमरूल लीग का निर्माण

►1916 मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)

►1917 महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन

►1919 रौलेट अधिनियम

►1919 जलियाँवाला बाग हत्याकांड

►1919 मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार

►1920 खिलाफत आंदोलन

►1920 असहयोग आंदोलन

►1922 चौरी-चौरा कांड

►1927 साइमन कमीशन की नियुक्ति

►1928 साइमन कमीशन का भारत आगमन

►1929 भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट

►1929 कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग

►1930 सविनय अवज्ञा आंदोलन

►1930 प्रथम गोलमेज सम्मेलन

►1931 द्वितीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 तृतीय गोलमेज सम्मेलन

►1932 सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा

►1932 पूना पैक्ट

►1942 भारत छोड़ो आंदोलन

►1942 क्रिप्स मिशन का आगमन

►1943 आजाद हिन्द फौज की स्थापना

►1946 कैबिनेट मिशन का आगमन

►1946 भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन

►1946 अंतरिम सरकार की स्थापना

►1947 भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना

►1947 भारतीय स्वतंत्रता प्राप्

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F1 Function key का यूज़ :- ये कंप्यूटर का सबसे पहला Function keys है ।अगर आप अपने कंप्यूटर या फिर लैपटॉप में F1 key को press करते है तो आपको किसी सॉफ्टवेर के बारे में जानना है तो आप F1 को दबा कर उसके हेल्प फाइल को ओपन कर सकते है.


F2 Function key का यूज़ :- इस फोल्डर के इस्तेमाल से आप किसी भी फाइल या फोल्डर का नाम बदल सकते है। किसी भी फाइल या फोल्डर को सेलेक्ट करके जैसे ही आप F2 को प्रेस करते है तो उसके बाद आप फाइल का नाम बदल सकते है ।


F3 Function keys का यूज़ :- इस फंक्शन को प्रेस करके आप विंडो सर्च मेनू ला सकते हैं आप F3 प्रेस कर के कुछ सर्च करना चाहते है कोई वेबपेज या डॉक्यूमेंट में स्पेसिफिक वर्ड तो आप F3 फंक्शन कीज(Function keys) प्रेस कर के सर्च कर सकते है ।

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Function key का यूज़ :- इस फंक्शन कीज Function keys का यूज़ आप ऑल्ट(alt) के साथ कर सकते है अगर आप alt+F4 दबाये तो आपके कंप्यूटर में जो भी एप्लीकेशन सामने खुला हुआ है वो क्लोज हो जायेगा इसके साथ ही अगर आप डेक्सटॉप पर जाकर alt+F4 प्रेस करते है तो यह शट डाउन (Shut Down) का आप्शन दिखा देगा। तब आप इससे अपने computer system को shutdown या restart कर सकते है ।


F5 Function keys का यूज़ :- इस की के यूज़ से आप अपने लैपटॉप या फिर कंप्यूटर को रिफ्रेश कर सकते है और अगर आपने कोई वेबसाइट ओपन कर रखा है और आप पेज रीलोड करना चाहते है तो आप F5 प्रेस कर के पेज को रीलोड कर सकते है ।


F6 Function keys का यूज़ :- अगर आप लैपटॉप में F6 press करते है तो इससे आप आवाज को कम कर सकते है और अगर आप ब्राउज़र पर कोई वेबसाइट ओपन कर रहे है और आप डायरेक्टली यूआरएल पे जाना चाहते है तो आप F6 प्रेस कर के सीधा address bar में जा सकते है ।

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F7 Function keys का यूज़ :- इस Function keys की मदद से आप वॉल्यूम बढ़ा सकते है अगर आप लैपटॉप में यूज़ कर रहे है तो , F7 Function keys का यूज़ ज्यादातर Ms-Word में किया जाता है, अगर आपको एमएस वर्ड में spelling चेक करना है तो आप F7 प्रेस कर के चेक कर सकते है ।


F8 Function key का यूज़ :- इस Function keys का यूज़ कर के आप safe mode option देख सकते है, अगर आपको safe mode में जाना है तो आपको इसके लिए विंडो के बूटिंग के समय F8 प्रेस कर के सेफ मोड सेलेक्ट कर सकते है ।


F9 Function keys का यूज़ :- इस key का विंडोज में तो कोई यूज़ नहीं है लेकिन इसका ज्यादातर यूज़ ms-word में यूज़ किया जाता है shift और alt की के साथ इस्तेमाल किया जाता है ।
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F10 Function key का यूज़ :- इसका भी कंप्यूटर के विंडोज में कुछ यूज़ नहीं है अगर आप विंडो में F10 प्रेस करेंगे तो कुछ भी नहीं होगा इसका यूज़ एमएस वर्ड में किया जाता है अगर आप msword में shift+F10 तो आपको वर्ड में shortcut दिखा देगा जैसे की कॉपी पेस्ट इत्यादि ।

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F11 Function key का यूज़ :- इस फंक्शन की Function keys का यूज़ कर के आप ब्राउज़र को फुल स्क्रीन मोड में यूज़ कर सकते है ।
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31 मार्च के Test का शेड्यूल

ये Test 31 March शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......


जिन भी विद्यार्थियों ने यह ... टेस्ट सीरीज नहीं ली है वह ले ले... यह टेस्ट सीरीज पूरे 5 महीने चलने वाली है.. इसमें आप का संपूर्ण पाठ्यक्रम बहुत अच्छे तरीके से कवर हो जाएगा

इसमें आपको संपूर्ण एनसीआरटी व अन्य सभी प्रतियोगी पुस्तक कवर की जाएगी....

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