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12 RAC NEW देहली बटालियन का फाइनल रिजल्ट
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विश्व हीमोफीलिया दिवस (World Hemophilia Day) : 17 अप्रैल
उद्देश्य :
• इस दुर्लभ रोग के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना।
शुरुआत :
• 17 अप्रैल,1989 को वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया (WFH) ने, संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल (Frank Schnabel's) के सम्मान में उनके जन्मदिवस को विश्व हीमोफीलिया दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी और 17 अप्रैल,1990 को यह दिवस पहली बार मनाया गया।
क्या है हीमोफीलिया :
• यह एक दुर्लभ आनुवांशिक रक्तस्राव विकार है जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं बन पाने के कारण व्यक्ति को चोट लगने पर रक्तस्त्राव (ब्लीडिंग) लम्बे समय तक रुकता नहीं है। ऐसा क्लॉटिंग फैक्टर्स नामक एक प्रोटीन की कमी के कारण होता है। इसके अलावा इसमें आंतरिक रक्तस्त्राव का भी खतरा बना रहता है।
पहचान :
• इस वंशानुगत रोग की पहचान जेनेटिक टेस्टिंग द्वारा की जाती है। हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के लिए यह टेस्ट काफी विश्वसनीय माना जाता है।
क्या उपचार संभव है ?
• जीन थेरेपी के जरिए इस रोग का ईलाज किया जाता है जिसकी दवा हाल ही में रोगियों पर असरकारक सिद्ध हुई है।
• सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार, "हीमोफीलिया का इलाज मिसिंग ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर को हटाकर किया जा सकता है।" इसके अलावा इसके उपचार में इंजेक्शन का सहारा भी लिया जाता है। यह एक मेडिकल प्रक्रिया है जो डॉक्टरों की विशेष टीम की देखरेख में पूरी होती है।
उद्देश्य :
• इस दुर्लभ रोग के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना।
शुरुआत :
• 17 अप्रैल,1989 को वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया (WFH) ने, संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल (Frank Schnabel's) के सम्मान में उनके जन्मदिवस को विश्व हीमोफीलिया दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी और 17 अप्रैल,1990 को यह दिवस पहली बार मनाया गया।
क्या है हीमोफीलिया :
• यह एक दुर्लभ आनुवांशिक रक्तस्राव विकार है जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं बन पाने के कारण व्यक्ति को चोट लगने पर रक्तस्त्राव (ब्लीडिंग) लम्बे समय तक रुकता नहीं है। ऐसा क्लॉटिंग फैक्टर्स नामक एक प्रोटीन की कमी के कारण होता है। इसके अलावा इसमें आंतरिक रक्तस्त्राव का भी खतरा बना रहता है।
पहचान :
• इस वंशानुगत रोग की पहचान जेनेटिक टेस्टिंग द्वारा की जाती है। हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के लिए यह टेस्ट काफी विश्वसनीय माना जाता है।
क्या उपचार संभव है ?
• जीन थेरेपी के जरिए इस रोग का ईलाज किया जाता है जिसकी दवा हाल ही में रोगियों पर असरकारक सिद्ध हुई है।
• सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार, "हीमोफीलिया का इलाज मिसिंग ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर को हटाकर किया जा सकता है।" इसके अलावा इसके उपचार में इंजेक्शन का सहारा भी लिया जाता है। यह एक मेडिकल प्रक्रिया है जो डॉक्टरों की विशेष टीम की देखरेख में पूरी होती है।
✍️जीरो से हीरो वाली क्लास✍️
🔰 पटवार ,वनरक्षक, वनपाल, SI , SSC GD, BSTC, PTET हेतु महत्वपूर्ण क्लास 🔰
🔹Classification। वर्गीकरण। (भाग-2) REASONING। । BY SUSHIL CHOUHAN SIR 🔹
👉 आज 11:00 AM पर
👉अब एक भी प्रश्न गलत नही होगा
LIVE CLASS LINK:- https://youtu.be/TmZ53o-7s38
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Reasoning | Classification | वर्गीकरण | भाग- 2 | रीजनिंग | by sushil sir | Taiyari karlo
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Bikaner Constable Bharti 2019 Final Result.pdf
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जिला बीकानेर का फाइनल रिजल्ट
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विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day)
हज़ारों वर्षों से मानव सभ्यता की विभिन्न विरासतें हमारे जीने के तरीकों का बखान करती आई हैं। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर (विरासत) दिवस स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़ी समृद्ध विरासत के संरक्षण प्रयासों के प्रति समर्पण भाव से मनाया जाता है।
उद्देश्य :
• सांस्कृतिक विरासत की विविधता के महत्व के सम्बन्ध में जागरूकता बढ़ाने और भावी पीढ़ियों के लिए इन्हें संरक्षित करने हेतु इस दिवस का अपना महत्व है।
शुरुआत :
• वर्ष 1982 में स्मारक और ऐतिहासिक स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) के प्रयासों को मान्यता देने व वैश्विक धरोहर स्थलों के लिए किए गए कार्यों की सराहना करते हुए अंततः यूनेस्को ने अपने 22 वें आम सम्मेलन के दौरान दिए गए सुझाव को स्वीकार किया और हर वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाने की आधिकारिक घोषणा की।
स्मारक और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) :
• 18 अप्रैल 1965 में International Council on Monuments and Sites (ICOMOS) नामक इस गैर-सरकारी संगठन की स्थापना वेनिस के चार्टर को अपनाने के बाद की गई थी। जिसका कार्य दुनिया भर में सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का संरक्षण करना है।
• वेनिस चार्टर को 1964 के अंतर्राष्ट्रीय चार्टर के रूप में भी जाना जाता है जो कि स्मारकों व ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना पर आधारित है।
• सर्वप्रथम 1931 के एथेंस चार्टर ने अंतर्राष्ट्रीय विरासत की अवधारणा को पेश किया था।
हज़ारों वर्षों से मानव सभ्यता की विभिन्न विरासतें हमारे जीने के तरीकों का बखान करती आई हैं। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर (विरासत) दिवस स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़ी समृद्ध विरासत के संरक्षण प्रयासों के प्रति समर्पण भाव से मनाया जाता है।
उद्देश्य :
• सांस्कृतिक विरासत की विविधता के महत्व के सम्बन्ध में जागरूकता बढ़ाने और भावी पीढ़ियों के लिए इन्हें संरक्षित करने हेतु इस दिवस का अपना महत्व है।
शुरुआत :
• वर्ष 1982 में स्मारक और ऐतिहासिक स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) के प्रयासों को मान्यता देने व वैश्विक धरोहर स्थलों के लिए किए गए कार्यों की सराहना करते हुए अंततः यूनेस्को ने अपने 22 वें आम सम्मेलन के दौरान दिए गए सुझाव को स्वीकार किया और हर वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाने की आधिकारिक घोषणा की।
स्मारक और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) :
• 18 अप्रैल 1965 में International Council on Monuments and Sites (ICOMOS) नामक इस गैर-सरकारी संगठन की स्थापना वेनिस के चार्टर को अपनाने के बाद की गई थी। जिसका कार्य दुनिया भर में सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का संरक्षण करना है।
• वेनिस चार्टर को 1964 के अंतर्राष्ट्रीय चार्टर के रूप में भी जाना जाता है जो कि स्मारकों व ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना पर आधारित है।
• सर्वप्रथम 1931 के एथेंस चार्टर ने अंतर्राष्ट्रीय विरासत की अवधारणा को पेश किया था।
नव चयनित सब इंस्पेक्टर जितेंद्र जी महला के हिंदी के हस्तलिखित नोट्स जो एक विद्यार्थी के जीवन भर की मेहनत होती है बताओ क्या किया जाए आज आपके लिए
Anonymous Poll
19%
एक दिन के लिए 51 रुपये
15%
1 दिन के लिए ₹21
25%
1 दिन के लिए ₹11
51%
1 दिन के लिए बिल्कुल फ्री कर दो
14%
सोच समझकर वोट करना अनाज वही पेट भरता है जिसका मूल्य चुकाया गया हो आपके वोट पर आज मैं यह करवा दूंगा
5_6334568220292285104.pdf
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जिला सिरोही का फाइनल रिजल्ट
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पुलिस विश्वविद्यालय से संबंधित कोर्स के लिए मुझे कॉल न करें इसकी आप जानकारी विश्वविद्यालय के फ़ोन पर कॉल करके लेवे
विजय रोझ इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस
विजय रोझ इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस
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2.4 MB
8वी बटालियन नई दिल्ली का फाइनल रिजल्ट
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✅ कुछ महान कार्यों से सम्बंधित व्यक्ति।
1. ब्रह्म समाज – राजाराममोहन राय
2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती
3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग
4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर
5. भक्ति आंदोलन – रामानुज
6. सिख धर्म – गुरु नानक
7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध
8. जैन धर्म – महावीर स्वामी
9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब
10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट
11. शक सम्वत – कनिष्क
12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य
13. न्याय दर्शन – गौतम
14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद
15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल
16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली
17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी
18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद
19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त
20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह
21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर
22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का
23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक
24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक
25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी
26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी
27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना – रास बिहारी बोस
28. भूदान आंदोलन – आचार्य विनोबा भावे
29. रेड क्रॉस – हेनरी ड्यूनेंट
30. स्वराज पार्टी की स्थापना – पंडित मोतीलाल नेहरु
31. गदर पार्टी की स्थापना – लाला हरदयाल
32. ‘वन्देमातरम्’ के रचियता – बंकिमचन्द्र चटर्जी
33. स्वर्ण मंदिर का निर्माण – गुरु अर्जुन देव
34. बारदोली आंदोलन – वल्लभभाई पटेल
35. पाकिस्तान की स्थापना – मो० अली जिन्ना
36. इंडियन एसोशिएशन की स्थापना – सुरेन्द नाथ बनर्जी
37. ओरुविले आश्रम की स्थापना- अरविन्द घोष
38. रुसी क्रांति के जनक – लेनिन
39. जामा मस्जिद का निर्माण – शाहजहाँ
40. विश्व भारती की स्थापना – रवीन्द्रनाथ टैगोर
41. दास प्रथा का उन्मूलन – अब्राहम लिंकन
42. चिपको आंदोलन – सुंदर लाल बहुगुणा
43. बैकों का राष्ट्रीकरण – इंदिरा गाँधी
44. ऑल इण्डिया वीमेन्स कांफ्रेंस की स्थापना – श्रीमती कमला देवी
45. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना – एम०एन० राय
46. नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना – शेख अब्दूल्ला
47. संस्कृत व्याकरण के जनक – पाणिनी
48. सिख राज्य की स्थापना – महाराजा रणजीत सिंह
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1. ब्रह्म समाज – राजाराममोहन राय
2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती
3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग
4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर
5. भक्ति आंदोलन – रामानुज
6. सिख धर्म – गुरु नानक
7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध
8. जैन धर्म – महावीर स्वामी
9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब
10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट
11. शक सम्वत – कनिष्क
12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य
13. न्याय दर्शन – गौतम
14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद
15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल
16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली
17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी
18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद
19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त
20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह
21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर
22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का
23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक
24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक
25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी
26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी
27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना – रास बिहारी बोस
28. भूदान आंदोलन – आचार्य विनोबा भावे
29. रेड क्रॉस – हेनरी ड्यूनेंट
30. स्वराज पार्टी की स्थापना – पंडित मोतीलाल नेहरु
31. गदर पार्टी की स्थापना – लाला हरदयाल
32. ‘वन्देमातरम्’ के रचियता – बंकिमचन्द्र चटर्जी
33. स्वर्ण मंदिर का निर्माण – गुरु अर्जुन देव
34. बारदोली आंदोलन – वल्लभभाई पटेल
35. पाकिस्तान की स्थापना – मो० अली जिन्ना
36. इंडियन एसोशिएशन की स्थापना – सुरेन्द नाथ बनर्जी
37. ओरुविले आश्रम की स्थापना- अरविन्द घोष
38. रुसी क्रांति के जनक – लेनिन
39. जामा मस्जिद का निर्माण – शाहजहाँ
40. विश्व भारती की स्थापना – रवीन्द्रनाथ टैगोर
41. दास प्रथा का उन्मूलन – अब्राहम लिंकन
42. चिपको आंदोलन – सुंदर लाल बहुगुणा
43. बैकों का राष्ट्रीकरण – इंदिरा गाँधी
44. ऑल इण्डिया वीमेन्स कांफ्रेंस की स्थापना – श्रीमती कमला देवी
45. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना – एम०एन० राय
46. नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना – शेख अब्दूल्ला
47. संस्कृत व्याकरण के जनक – पाणिनी
48. सिख राज्य की स्थापना – महाराजा रणजीत सिंह
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ऊंट 🐪( Camel )संबंधित विस्तृत विश्लेषण
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
◼ बाड़मेर-
✍ राजस्थान में सर्वाधिक ऊँटों वाला जिला बाड़मेर है।
◼ प्रतापगढ़-
✍ राजस्थान में सबसे कम ऊँटों वाला जिला प्रतापगढ़ है।
👉 राजस्थान में ऊँटों की नस्लें-
◼गोमठ ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में गोमठ ऊंट सर्वाधिक जोधपुर की फलोदी तहसिल में पाया जाता है।
✍ गोमठ ऊँट सवारी हेतु प्रसिद्ध माना जाता है।
◼नाचना ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में नाचना ऊँट सर्वाधिक जैसलमेर में पाया जाता है।
✍ यह ऊँट सबसे सुन्दर ऊँट माना जाता है।
✍ यह ऊँट राजस्थान में नाचने हेतु प्रसिद्ध है।
◼जैसलमेरी ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में जैसलमेरी ऊँट सर्वाधिक जैसलमेर में पाया जाता है जिसे रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है।
👉 राजस्थान में ऊँटों की अन्य नस्लें-
1. अलवरी ऊँट
2. सिंधी ऊँट
3. कच्छी ऊँट
4. बीकानेरी ऊँट
👉 ऊँटों से संबंधि अन्य तथ्य-
◼ मोहम्मद बिन कासिम-
✍ भारत में सर्वप्रथम ऊंट मोहम्मद बिन कासिम लेकर आया था इसीलिए भारत में ऊंट लाने का श्रेय मोहम्मद बिन कासिम को दिया जाता है।
◼ पाबूजी-
✍ राजस्थान में ऊंट सर्वप्रथम ऊंट पाबूजी लेकर आये थे इसीलिए राजस्थान में ऊंट लाने का श्रेय पाबूजी महाराज को दिया जाता है।
✍ पाबूजी को ऊंटो का देवता भी कहते है।
◼ 30 जून 2014-
✍ राजस्थान सरकार ने 30 जून 2014 को ऊँट को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा दिया था जिसकी घोषणा बीकानेर जिले में की गई थी।
◼ रेबारी जाति या राईका जाति-
✍ राजस्थान में ऊँट पालने के लिए रेबारी जाति प्रसिद्ध है।
◼सारणेश्वर महादेव मंदिर-
👉 स्थित- सिरोही (राजस्थान)
✍ इस मंदिर में भाद्रपद शुक्ला द्वादशी के दिन रेबारी जाति का सबसे बड़ा मेला लगता है।
◼ उस्ता कला-
✍ राजस्थान में ऊँट की खाल के उपर की जाने वाली मिनाकारी को उस्ता कला कहते है।
✍ उस्ता कला के लिए राजस्थान के बीकानेर जिले का हिसामुद्दीन उस्ता का परिवार प्रसिद्ध है।
◼ काॅपी-
✍ राजस्थान में ऊंट की खाल से बनाये जाने वाले ठण्डे पानी के जलपात्रों को काॅपी कहा जाता है।
◼ गंगा रिसाला-
✍ बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने एक ऊँट सेना तैयार की थी जिसे गंगा रिसाला के नाम से जाना जाता है।
◼ उरमूल डेयरी-
✍ स्थित- बीकानेर (राजस्थान)
✍ यह भारत की एकमात्र ऊँटनी के दूध की डेयरी है।
✍ ऊंटनी के दूध में भरपुर मात्रा में विटामीन सी पाया जाता है।
◼ गोरबंद-
✍ यह राजस्थान का एक ऊँट श्रृंगार गीत है।
◼ गिरबाण-
✍ यह ऊँट के नाक में डाले जाने वाला आभूषण है।
✍ गिरबाण मुख्यतः लकड़ी का बना होता है।
◼ ऊँट अनुसंधान केन्द्र-
👉 स्थित- जोहड़बीड़, बीकानेर (राजस्थान)
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
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◼ बाड़मेर-
✍ राजस्थान में सर्वाधिक ऊँटों वाला जिला बाड़मेर है।
◼ प्रतापगढ़-
✍ राजस्थान में सबसे कम ऊँटों वाला जिला प्रतापगढ़ है।
👉 राजस्थान में ऊँटों की नस्लें-
◼गोमठ ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में गोमठ ऊंट सर्वाधिक जोधपुर की फलोदी तहसिल में पाया जाता है।
✍ गोमठ ऊँट सवारी हेतु प्रसिद्ध माना जाता है।
◼नाचना ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में नाचना ऊँट सर्वाधिक जैसलमेर में पाया जाता है।
✍ यह ऊँट सबसे सुन्दर ऊँट माना जाता है।
✍ यह ऊँट राजस्थान में नाचने हेतु प्रसिद्ध है।
◼जैसलमेरी ऊँट-
✍ विशेषता-
✍ राजस्थान में जैसलमेरी ऊँट सर्वाधिक जैसलमेर में पाया जाता है जिसे रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है।
👉 राजस्थान में ऊँटों की अन्य नस्लें-
1. अलवरी ऊँट
2. सिंधी ऊँट
3. कच्छी ऊँट
4. बीकानेरी ऊँट
👉 ऊँटों से संबंधि अन्य तथ्य-
◼ मोहम्मद बिन कासिम-
✍ भारत में सर्वप्रथम ऊंट मोहम्मद बिन कासिम लेकर आया था इसीलिए भारत में ऊंट लाने का श्रेय मोहम्मद बिन कासिम को दिया जाता है।
◼ पाबूजी-
✍ राजस्थान में ऊंट सर्वप्रथम ऊंट पाबूजी लेकर आये थे इसीलिए राजस्थान में ऊंट लाने का श्रेय पाबूजी महाराज को दिया जाता है।
✍ पाबूजी को ऊंटो का देवता भी कहते है।
◼ 30 जून 2014-
✍ राजस्थान सरकार ने 30 जून 2014 को ऊँट को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा दिया था जिसकी घोषणा बीकानेर जिले में की गई थी।
◼ रेबारी जाति या राईका जाति-
✍ राजस्थान में ऊँट पालने के लिए रेबारी जाति प्रसिद्ध है।
◼सारणेश्वर महादेव मंदिर-
👉 स्थित- सिरोही (राजस्थान)
✍ इस मंदिर में भाद्रपद शुक्ला द्वादशी के दिन रेबारी जाति का सबसे बड़ा मेला लगता है।
◼ उस्ता कला-
✍ राजस्थान में ऊँट की खाल के उपर की जाने वाली मिनाकारी को उस्ता कला कहते है।
✍ उस्ता कला के लिए राजस्थान के बीकानेर जिले का हिसामुद्दीन उस्ता का परिवार प्रसिद्ध है।
◼ काॅपी-
✍ राजस्थान में ऊंट की खाल से बनाये जाने वाले ठण्डे पानी के जलपात्रों को काॅपी कहा जाता है।
◼ गंगा रिसाला-
✍ बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने एक ऊँट सेना तैयार की थी जिसे गंगा रिसाला के नाम से जाना जाता है।
◼ उरमूल डेयरी-
✍ स्थित- बीकानेर (राजस्थान)
✍ यह भारत की एकमात्र ऊँटनी के दूध की डेयरी है।
✍ ऊंटनी के दूध में भरपुर मात्रा में विटामीन सी पाया जाता है।
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✍ यह राजस्थान का एक ऊँट श्रृंगार गीत है।
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✍ यह ऊँट के नाक में डाले जाने वाला आभूषण है।
✍ गिरबाण मुख्यतः लकड़ी का बना होता है।
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