राजस्थान का 100% सौर ऊर्जा से संचालित रेलवे स्टेशन कौन सा बना है?
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79%
गांधीनगर, जयपुर
21%
मेड़ता रोड़, नागौर
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एक सवाल ज़िंदगी बदल देगा।Supar fast geography rivers consult map by Ashu sir 😳😳#vdomainsgeography
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राजस्थान_का_साहित्यकार_व_उनकी_रचनाएँ.pdf
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राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें :
(i) सांभर झील-जयपुर जिले में जयपुर से लगभग 65 कि.मी. पश्चिम में स्थित सांभर झील भारत की खारे पानी की प्रमुख झील है। यहाँ नमक का उत्पादन होता है और समुद्री नमक के अतिरिक्त सांभर में ही सबसे अधिक नमक का उत्पादन होता है। झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 150 वर्ग कि.मी. है तथा इसका जल-ग्रहण क्षेत्र 2500 वर्ग कि.मी. में फैला है। इसमें चार प्रमुख जल धाराएँ-रूपनगर, मेघना, खारी और खांडेल आकर गिरती हैं, जो वर्षा काल में झील को जल से भर देती हैं। सांभर में नमक की उत्पत्ति के सम्बन्ध में भू-गर्भवेत्ताओं में मतभेद है। हॉलैण्ड इसे वायु द्वारा बहा कर लाया गया बताते हैं तो अन्य जल द्वारा, जबकि कुछ विद्वान स्थानीय चट्टानों को इसका स्रोत बतलाते हैं। वास्तविकता यह है कि सम्पूर्ण झील का तल 20 मीटर मोटी लवणयुक्त मृदा की तह से आवृत है। यहाँ सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, सोडियम कार्बोनेट और सोडियम-बाई-कार्बोनेट का उत्पादन होता है। यह सम्पूर्ण उत्पादन 'हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड' कम्पनी द्वारा किया जाता है।
(ii) डीडवाना झील-नागौर जिले में डीडवाना नगर के निकट यह नमकीन पानी की झील है, जो लगभग 4 कि.मी. लम्बाई में फैली है। इस झील से सोडियम लवण तैयार होता है, जिसे तैयार करने हेतु यहाँ एक सोडियम सल्फेट का संयंत्र लगा हुआ है।
(ii) पचपद्रा झील-बाड़मेर जिले में पचपद्रा नामक स्थान पर यह खारे पानी की झील है। इस झील का विस्तार लगभग 25 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में है। यहाँ उत्तम किस्म का नमक तैयार होता है, जिसमें 98% तक सोडियम क्लोराइड की मात्रा पाई जाती है।
(iv) लूनकरनसर झील-बीकानेर से लगभग 80 कि.मी. दूर लूनकरनसर में यह झील है, किन्तु नमक बनाने में इसका उपयोग नहीं के बराबर है।
राजस्थान की नमकीन पानी की अन्य छोटी झीलें
फलौदी, कुचामन, कावोद (जैसलमेर), कद्दोर, रेवासा आदि हैं। राज्य की समस्त लवणीय झीलें पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में ही पाई जाती हैं, जो पश्चिमी एशिया के मरुस्थल में स्थित 'प्लाया' या अर्जेण्टाइना की 'साल्टा' झीलों के समान है। भू-गर्भिक बनावट की विशेषता के कारण ही इन झीलों का जल लवणीय है।
(i) सांभर झील-जयपुर जिले में जयपुर से लगभग 65 कि.मी. पश्चिम में स्थित सांभर झील भारत की खारे पानी की प्रमुख झील है। यहाँ नमक का उत्पादन होता है और समुद्री नमक के अतिरिक्त सांभर में ही सबसे अधिक नमक का उत्पादन होता है। झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 150 वर्ग कि.मी. है तथा इसका जल-ग्रहण क्षेत्र 2500 वर्ग कि.मी. में फैला है। इसमें चार प्रमुख जल धाराएँ-रूपनगर, मेघना, खारी और खांडेल आकर गिरती हैं, जो वर्षा काल में झील को जल से भर देती हैं। सांभर में नमक की उत्पत्ति के सम्बन्ध में भू-गर्भवेत्ताओं में मतभेद है। हॉलैण्ड इसे वायु द्वारा बहा कर लाया गया बताते हैं तो अन्य जल द्वारा, जबकि कुछ विद्वान स्थानीय चट्टानों को इसका स्रोत बतलाते हैं। वास्तविकता यह है कि सम्पूर्ण झील का तल 20 मीटर मोटी लवणयुक्त मृदा की तह से आवृत है। यहाँ सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, सोडियम कार्बोनेट और सोडियम-बाई-कार्बोनेट का उत्पादन होता है। यह सम्पूर्ण उत्पादन 'हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड' कम्पनी द्वारा किया जाता है।
(ii) डीडवाना झील-नागौर जिले में डीडवाना नगर के निकट यह नमकीन पानी की झील है, जो लगभग 4 कि.मी. लम्बाई में फैली है। इस झील से सोडियम लवण तैयार होता है, जिसे तैयार करने हेतु यहाँ एक सोडियम सल्फेट का संयंत्र लगा हुआ है।
(ii) पचपद्रा झील-बाड़मेर जिले में पचपद्रा नामक स्थान पर यह खारे पानी की झील है। इस झील का विस्तार लगभग 25 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में है। यहाँ उत्तम किस्म का नमक तैयार होता है, जिसमें 98% तक सोडियम क्लोराइड की मात्रा पाई जाती है।
(iv) लूनकरनसर झील-बीकानेर से लगभग 80 कि.मी. दूर लूनकरनसर में यह झील है, किन्तु नमक बनाने में इसका उपयोग नहीं के बराबर है।
राजस्थान की नमकीन पानी की अन्य छोटी झीलें
फलौदी, कुचामन, कावोद (जैसलमेर), कद्दोर, रेवासा आदि हैं। राज्य की समस्त लवणीय झीलें पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में ही पाई जाती हैं, जो पश्चिमी एशिया के मरुस्थल में स्थित 'प्लाया' या अर्जेण्टाइना की 'साल्टा' झीलों के समान है। भू-गर्भिक बनावट की विशेषता के कारण ही इन झीलों का जल लवणीय है।
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