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4th Grade चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2024 : स्क्रुटनी फॉर्म भरने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश
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🛑 CURRENT AFFAIRS 🛑
1. भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
टैरिफ में कटौती: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क (Import Tariff) को 25% से घटाकर 18% कर दिया है।
महत्त्व: यह फैसला भारतीय निर्यातकों को चीन, वियतनाम, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुकाबले वैश्विक बाजार में बड़ी बढ़त दिलाएगा।
शर्त: अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो उस पर लगा 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी हटाया जा सकता है।
संदर्भ: यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद आया है।
2. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा
उद्देश्य: 2 फरवरी से शुरू हुई 3-दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन डीसी में आयोजित 'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक' में भाग लेना है।
आमंत्रण: उन्हें अमेरिकी स्टेट सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने आमंत्रित किया है।
सहभागिता: इस बैठक में भारत, यूरोपीय संघ (EU), यूके, जापान समेत 55 से ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं।
मुख्य विषय: महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना।
भारत का संदर्भ: भारत सरकार ने जुलाई 2023 में 30 महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे कोबाल्ट, कॉपर, लिथियम आदि) की सूची जारी की थी।
3. वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2026 (World Government Summit)
स्थान: दुबई (UAE) में इसका शुभारंभ हुआ।
विषय (Theme): "भविष्य की सरकारों को आकार देना" (Shaping Future Governments)।
प्रतिभागी: इसमें 450 से अधिक वैश्विक हस्तियां, राष्ट्रपति, मंत्री और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
मुख्य फोकस: नवाचार (Innovation), स्थिरता और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सार्वजनिक नीतियों को आधुनिक बनाना।
उद्देश्य: आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सरकारी नीतियों को मजबूत करना।
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1. CDS जनरल अनिल चौहान की आर्मेनिया यात्रा
समाचार: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान 1 फरवरी (2026) को 4-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया पहुँचे।
उद्देश्य: भारत और आर्मेनिया के बीच सुरक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना।
पृष्ठभूमि: हाल ही में 18 जनवरी को भारत ने 'पिनाका रॉकेट प्रणाली' की पहली खेप आर्मेनिया को भेजी थी।
राजनयिक: आर्मेनिया में भारत की राजदूत निलाक्षी साहा सिन्हा ने उनका स्वागत किया।
2. नई नियुक्ति: नौसेना आयुध महानिदेशक (DGONA)
नियुक्ति: श्री दिवाकर जयंत ने 2 फरवरी, 2026 को रक्षा मंत्रालय में 'नौसेना आयुध महानिदेशक' (Director General of Naval Armament) का पदभार ग्रहण किया।
कैडर: वे भारतीय नौसेना आयुध सेवा (INAS) के 1991 बैच के अधिकारी हैं।
उत्तराधिकारी: उन्होंने श्री पी. उपाध्याय का स्थान लिया है, जो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए।
अनुभव: उनके पास नौसेना आयुध डिपो और मंत्रालय में कार्य करने का 33 वर्षों का अनुभव है।
3. DRDO: सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण
समाचार: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से SFDR तकनीक का सफल प्रदर्शन किया।
महत्त्व: इस सफलता के साथ भारत इस उन्नत तकनीक से लैस दुनिया के विशिष्ट देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
उपयोगिता: यह तकनीक लंबी दूरी की वायु-से-वायु मिसाइलों (Long-range Air-to-Air Missiles) के विकास में सहायक होगी, जिससे भारत की मारक क्षमता और सामरिक बढ़त बढ़ेगी।
प्रशंसा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और उद्योग जगत की सराहना की।
समाचार: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान 1 फरवरी (2026) को 4-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया पहुँचे।
उद्देश्य: भारत और आर्मेनिया के बीच सुरक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना।
पृष्ठभूमि: हाल ही में 18 जनवरी को भारत ने 'पिनाका रॉकेट प्रणाली' की पहली खेप आर्मेनिया को भेजी थी।
राजनयिक: आर्मेनिया में भारत की राजदूत निलाक्षी साहा सिन्हा ने उनका स्वागत किया।
2. नई नियुक्ति: नौसेना आयुध महानिदेशक (DGONA)
नियुक्ति: श्री दिवाकर जयंत ने 2 फरवरी, 2026 को रक्षा मंत्रालय में 'नौसेना आयुध महानिदेशक' (Director General of Naval Armament) का पदभार ग्रहण किया।
कैडर: वे भारतीय नौसेना आयुध सेवा (INAS) के 1991 बैच के अधिकारी हैं।
उत्तराधिकारी: उन्होंने श्री पी. उपाध्याय का स्थान लिया है, जो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए।
अनुभव: उनके पास नौसेना आयुध डिपो और मंत्रालय में कार्य करने का 33 वर्षों का अनुभव है।
3. DRDO: सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण
समाचार: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से SFDR तकनीक का सफल प्रदर्शन किया।
महत्त्व: इस सफलता के साथ भारत इस उन्नत तकनीक से लैस दुनिया के विशिष्ट देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
उपयोगिता: यह तकनीक लंबी दूरी की वायु-से-वायु मिसाइलों (Long-range Air-to-Air Missiles) के विकास में सहायक होगी, जिससे भारत की मारक क्षमता और सामरिक बढ़त बढ़ेगी।
प्रशंसा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और उद्योग जगत की सराहना की।
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