केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत पवेलियन का उद्घाटन किया
केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने स्पेन के बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत पैवेलियन का उद्घाटन किया।
यह विश्व के अग्रणी प्रौद्योगिकी और दूरसंचार मंचों में से एक है। इस वर्ष भारत पवेलियन में मूल्य शृंखला के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 से अधिक भारतीय दूरसंचार नवोन्मेषकों को एक साथ लाया गया है, जो 4जी/5जी तथा उभरते 6जी प्रौद्योगिकियों, ओपन RAN, ऑप्टिकल एवं उपग्रह संचार, सेमीकंडक्टर डिजाइन, एआई-आधारित नेटवर्क इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, दूरसंचार सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने स्पेन के बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत पैवेलियन का उद्घाटन किया।
यह विश्व के अग्रणी प्रौद्योगिकी और दूरसंचार मंचों में से एक है। इस वर्ष भारत पवेलियन में मूल्य शृंखला के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 से अधिक भारतीय दूरसंचार नवोन्मेषकों को एक साथ लाया गया है, जो 4जी/5जी तथा उभरते 6जी प्रौद्योगिकियों, ओपन RAN, ऑप्टिकल एवं उपग्रह संचार, सेमीकंडक्टर डिजाइन, एआई-आधारित नेटवर्क इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, दूरसंचार सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का किया शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का शुभारंभ किया।
मुख्य भाषण देते हुए फिनलैंड के राष्ट्रपति आलेक्सांदर स्तूब ने कहा कि विकासशील और अल्पविकसित देश यह तय करेगें कि भविष्य में विश्व व्यवस्था कैसी होगी और इसमें भारत की अहम भूमिका होगी।
भारत का प्रमुख भू-राजनीति और भू-अर्थव्यवस्था सम्मेलन, रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण 5 मार्च से नई दिल्ली में शुरू हो गया है।
यह तीन दिवसीय आयोजन 5 से 7 मार्च 2026 तक चलेगा। यह 2016 से हर साल आयोजित किया जाता है। साल 2016 से हर वर्ष आयोजित होने वाला यह सम्मेलन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
इस वर्ष का थीम “Saṁskāra: Assertion, Accommodation, Advancement” है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच सभ्यतागत निरंतरता, अनुकूलन और प्रगति पर केंद्रित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का शुभारंभ किया।
मुख्य भाषण देते हुए फिनलैंड के राष्ट्रपति आलेक्सांदर स्तूब ने कहा कि विकासशील और अल्पविकसित देश यह तय करेगें कि भविष्य में विश्व व्यवस्था कैसी होगी और इसमें भारत की अहम भूमिका होगी।
भारत का प्रमुख भू-राजनीति और भू-अर्थव्यवस्था सम्मेलन, रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण 5 मार्च से नई दिल्ली में शुरू हो गया है।
यह तीन दिवसीय आयोजन 5 से 7 मार्च 2026 तक चलेगा। यह 2016 से हर साल आयोजित किया जाता है। साल 2016 से हर वर्ष आयोजित होने वाला यह सम्मेलन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
इस वर्ष का थीम “Saṁskāra: Assertion, Accommodation, Advancement” है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच सभ्यतागत निरंतरता, अनुकूलन और प्रगति पर केंद्रित है।
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भारत-फिनलैंड ने पर्यावरण सहयोग समझौता ज्ञापन का किया नवीनीकरण
भारत और फिनलैंड के बीच पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
दोनों देशों ने वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित पर्यावरण सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। नवीनीकृत समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा। इसके तहत वायु और जल प्रदूषण की रोकथाम तथा नियंत्रण, दूषित मिट्टी के पुनः उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन, खतरनाक अपशिष्ट के निपटान, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भारत और फिनलैंड के बीच पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
दोनों देशों ने वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित पर्यावरण सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। नवीनीकृत समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा। इसके तहत वायु और जल प्रदूषण की रोकथाम तथा नियंत्रण, दूषित मिट्टी के पुनः उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन, खतरनाक अपशिष्ट के निपटान, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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