राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस
🔹पंचायती राज संस्थाएं भारत के बुनियादी लोकतंत्र की आधारशिला हैं और ग्राम स्वशासन में उनकी ऐतिहासिक जड़ें गहरी हैं। 1993 में 73वें संविधान संशोधन द्वारा उन्हें मजबूत किया गया था।
🔹2.5 लाख से अधिक पंचायतों और 49.75 प्रतिशत महिलाओं सहित 24.04 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ, स्थानीय शासन अधिक समावेशी हो गया है।
🔹ई-ग्राम स्वराज, मेरी पंचायत, पंचायत निर्णय, ऑडिटऑनलाइन, स्वामित्व, ग्राम मंच, सभासार, स्थानीय सरकार निर्देशिका, प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल और ग्राम ऊर्जा स्वराज जैसे डिजिटल समाधान और प्लेटफॉर्म पारदर्शिता और दक्षता में सुधार कर रहे हैं।
🔹मजबूत वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) जैसी योजनाएं क्षमता निर्माण, भागीदारी योजना और सतत विकास को और बढ़ाती हैं।
🔹पंचायती राज संस्थाएं भारत के बुनियादी लोकतंत्र की आधारशिला हैं और ग्राम स्वशासन में उनकी ऐतिहासिक जड़ें गहरी हैं। 1993 में 73वें संविधान संशोधन द्वारा उन्हें मजबूत किया गया था।
🔹2.5 लाख से अधिक पंचायतों और 49.75 प्रतिशत महिलाओं सहित 24.04 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ, स्थानीय शासन अधिक समावेशी हो गया है।
🔹ई-ग्राम स्वराज, मेरी पंचायत, पंचायत निर्णय, ऑडिटऑनलाइन, स्वामित्व, ग्राम मंच, सभासार, स्थानीय सरकार निर्देशिका, प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल और ग्राम ऊर्जा स्वराज जैसे डिजिटल समाधान और प्लेटफॉर्म पारदर्शिता और दक्षता में सुधार कर रहे हैं।
🔹मजबूत वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) जैसी योजनाएं क्षमता निर्माण, भागीदारी योजना और सतत विकास को और बढ़ाती हैं।
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लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2026 🏆
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। 🎉
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। 🎉
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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की प्रतिष्ठित परियोजना ‘दन्तक’ ने 24 अप्रैल, 2026 को भूटान की राजधानी थिम्पू में अपना 66वां स्थापना दिवस उत्सवपूर्ण ढंग से मनाया।
इस परियोजना ने अप्रैल 1961 में स्थापना के बाद से भूटान में 65 वर्षों की समर्पित सेवा का महत्वपूर्ण पड़ाव भी पूरा किया है। यह अवसर भारत व भूटान के बीच सुदृढ़ एवं दीर्घकालिक साझेदारी को और सशक्त करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
इस परियोजना ने अप्रैल 1961 में स्थापना के बाद से भूटान में 65 वर्षों की समर्पित सेवा का महत्वपूर्ण पड़ाव भी पूरा किया है। यह अवसर भारत व भूटान के बीच सुदृढ़ एवं दीर्घकालिक साझेदारी को और सशक्त करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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