🔰 राजस्थान के लोक गीत ✅
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अति विशेष ☑️
1. झोरावा गीत
जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो पत्नी अपने पति के वियोग में गाती है।
2. सुवटिया
उत्तरी मेवाड़ में भील जाति की स्त्रियां पति -वियोग में तोते (सूए) को संबोधित करते हुए यह गीत गाती है।
3. पीपली गीत
मारवाड़ बीकानेर तथा शेखावटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के समय स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
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4. सेंजा गीत
यह एक विवाह गीत है, जो अच्छे वर की कामना हेतु महिलाओं द्वारा गया जाता है।
5. कुरजां गीत
यह लोकप्रिय गीत में कुरजां पक्षी को संबोधित करते हुए विरहणियों द्वारा अपने प्रियतम की याद में गाया जाता है, जिसमें नायिका अपने परदेश स्थित पति के लिए कुरजां को सन्देश देने का कहती है।
6. जकडि़या गीत
पीरों की प्रशंसा में गाए जाने वाले गीत जकडि़या गीत कहलाते है।
7. पपीहा गीत
पपीहा पक्षी को सम्बोधित करते हुए गया गया गीत है। जिसमें प्रेमिका अपने प्रेमी को उपवन में आकर मिलने की प्रार्थना करती है।
8. कागा गीत
कौवे का घर की छत पर आना मेहमान आने का शगुन माना जाता है। कौवे को संबोधित करके प्रेयसी अपने प्रिय के आने का शगुन मानती है और कौवे को लालच देकर उड़ने की कहती है।
9. कांगसियों
यह राजस्थान का एक लोकप्रिय श्रृंगारिक गीत है।
10. हमसीढो
भील स्त्री तथा पुरूष दोनों द्वारा सम्मिलित रूप से मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला गीत है।
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11. हरजस
यह भक्ति गीत है, हरजस का अर्थ है हरि का यश अर्थात हरजस भगवान राम व श्रीकृष्ण की भक्ति में गाए जाने वाले भक्ति गीत है।
12. हिचकी गीत
मेवात क्षेत्र अथवा अलवर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत दाम्पत्य प्रेम से परिपूर्ण जिसमें प्रियतम की याद को दर्शाया जाता है।
13. जलो और जलाल
विवाह के समय वधु पक्ष की स्त्रियां जब वर की बारात का डेरा देखने आती है तब यह गीत गाती है।
14. दुप्पटा गीत
विवाह के समय दुल्हे की सालियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
15. कामण
कामण का अर्थ है - जादू-टोना। पति को अन्य स्त्री के जादू-टोने से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है।
16. पावणा
विवाह के पश्चात् दामाद के ससुराल जाने पर भोजन के समय अथवा भोजन के उपरान्त स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
17. सिठणें
विवाह के समय स्त्रियां हंसी-मजाक के उद्देश्य से समधी और उसके अन्य सम्बन्धियों को संबोधित करते हुए गाती है।
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18. मोरिया गीत
इस लोकगीत में ऐसी बालिका की व्यथा है, जिसका संबंध तो तय हो चुका है लेकिन विवाह में देरी है।
19. जीरो
जालौर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है। इस गीत में स्त्री अपने पति से जीरा न बोने की विनती करती है।
20. बिच्छुड़ो
हाडौती क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जिसमें एक स्त्री जिसे बिच्छु ने काट लिया है और वह मरने वाली है, वह पति को दूसरा विवाह करने का संदेश देती है।
21. पंछीडा गीत
हाडौती तथा ढूढाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो त्यौहारों तथा मेलों के समय गाया जाता है।
22. रसिया गीत
रसिया होली के अवसर पर ब्रज, भरतपुर व धौलपुर क्षेत्रों के अलावा नाथद्वारा के श्रीनाथजी के मंदिर में गए जाने वाले गीत है।
23. घूमर
णगौर अथवा तीज त्यौहारों के अवसर पर स्त्रियों द्वारा घूमर नृत्य के साथ गाया जाने वाला गीत है, जिसके माध्यम से नायिका अपने प्रियतम से श्रृंगारिक साधनों की मांग करती है।
24. औल्यूं गीत
ओल्यू का मतलब 'याद आना' है।बेटी की विदाई के समयय गाया जाने वाला गीत है।
25. लांगुरिया
करौली की कैला देवी की अराधना में गाये जाने वाले भक्तिगीत लांगुरिया कहलाते है।
26. गोरबंध
गोरबंध, ऊंट के गले का आभूषण है। मारवाड़ तथा शेखावटी क्षेत्र में इस आभूषण पर गीत गाया जाता है।
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27. चिरमी
चिरमी के पौधे को सम्बोधित कर बाल ग्राम वधू द्वारा अपने भाई व पिता की प्रतिक्षा के समय की मनोदशा का वर्णन है।
28. पणिहारी
इस लोकगीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रता धर्म पर अटल रहना बताया गया है।
29. इडुणी
यह गीत पानी भरने जाते समय स्त्रियों द्वारा गाया जाता है। इसमें इडुणी के खो जाने का जिक्र होता है।
30. केसरिया बालम
यह एक प्रकार का विरह युक्त रजवाड़ी गीत है जिसे स्त्री विदेश गए हुए अपने पति की याद में गाती है।
31. धुडला गीत
मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है, जो स्त्रियों द्वारा घुड़ला पर्व पर गाया जाता है।
32. लावणी गीत(मोरध्वज, सेऊसंमन- प्रसिद्ध लावणियां)
लावणी से अभिप्राय बुलावे से है। नायक द्वारा नायिका को बुलाने के सन्दर्भ में लावणी गाई जाती है।
33. मूमल
जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत, जिसमें लोद्रवा की राजकुमारी मूमल का सौन्दर्य वर्णन किया गया है। यह एक श्रृंगारिक गीत है।
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1. झोरावा गीत
जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो पत्नी अपने पति के वियोग में गाती है।
2. सुवटिया
उत्तरी मेवाड़ में भील जाति की स्त्रियां पति -वियोग में तोते (सूए) को संबोधित करते हुए यह गीत गाती है।
3. पीपली गीत
मारवाड़ बीकानेर तथा शेखावटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के समय स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
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4. सेंजा गीत
यह एक विवाह गीत है, जो अच्छे वर की कामना हेतु महिलाओं द्वारा गया जाता है।
5. कुरजां गीत
यह लोकप्रिय गीत में कुरजां पक्षी को संबोधित करते हुए विरहणियों द्वारा अपने प्रियतम की याद में गाया जाता है, जिसमें नायिका अपने परदेश स्थित पति के लिए कुरजां को सन्देश देने का कहती है।
6. जकडि़या गीत
पीरों की प्रशंसा में गाए जाने वाले गीत जकडि़या गीत कहलाते है।
7. पपीहा गीत
पपीहा पक्षी को सम्बोधित करते हुए गया गया गीत है। जिसमें प्रेमिका अपने प्रेमी को उपवन में आकर मिलने की प्रार्थना करती है।
8. कागा गीत
कौवे का घर की छत पर आना मेहमान आने का शगुन माना जाता है। कौवे को संबोधित करके प्रेयसी अपने प्रिय के आने का शगुन मानती है और कौवे को लालच देकर उड़ने की कहती है।
9. कांगसियों
यह राजस्थान का एक लोकप्रिय श्रृंगारिक गीत है।
10. हमसीढो
भील स्त्री तथा पुरूष दोनों द्वारा सम्मिलित रूप से मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला गीत है।
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11. हरजस
यह भक्ति गीत है, हरजस का अर्थ है हरि का यश अर्थात हरजस भगवान राम व श्रीकृष्ण की भक्ति में गाए जाने वाले भक्ति गीत है।
12. हिचकी गीत
मेवात क्षेत्र अथवा अलवर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत दाम्पत्य प्रेम से परिपूर्ण जिसमें प्रियतम की याद को दर्शाया जाता है।
13. जलो और जलाल
विवाह के समय वधु पक्ष की स्त्रियां जब वर की बारात का डेरा देखने आती है तब यह गीत गाती है।
14. दुप्पटा गीत
विवाह के समय दुल्हे की सालियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
15. कामण
कामण का अर्थ है - जादू-टोना। पति को अन्य स्त्री के जादू-टोने से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है।
16. पावणा
विवाह के पश्चात् दामाद के ससुराल जाने पर भोजन के समय अथवा भोजन के उपरान्त स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।
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विवाह के समय स्त्रियां हंसी-मजाक के उद्देश्य से समधी और उसके अन्य सम्बन्धियों को संबोधित करते हुए गाती है।
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इस लोकगीत में ऐसी बालिका की व्यथा है, जिसका संबंध तो तय हो चुका है लेकिन विवाह में देरी है।
19. जीरो
जालौर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है। इस गीत में स्त्री अपने पति से जीरा न बोने की विनती करती है।
20. बिच्छुड़ो
हाडौती क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जिसमें एक स्त्री जिसे बिच्छु ने काट लिया है और वह मरने वाली है, वह पति को दूसरा विवाह करने का संदेश देती है।
21. पंछीडा गीत
हाडौती तथा ढूढाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो त्यौहारों तथा मेलों के समय गाया जाता है।
22. रसिया गीत
रसिया होली के अवसर पर ब्रज, भरतपुर व धौलपुर क्षेत्रों के अलावा नाथद्वारा के श्रीनाथजी के मंदिर में गए जाने वाले गीत है।
23. घूमर
णगौर अथवा तीज त्यौहारों के अवसर पर स्त्रियों द्वारा घूमर नृत्य के साथ गाया जाने वाला गीत है, जिसके माध्यम से नायिका अपने प्रियतम से श्रृंगारिक साधनों की मांग करती है।
24. औल्यूं गीत
ओल्यू का मतलब 'याद आना' है।बेटी की विदाई के समयय गाया जाने वाला गीत है।
25. लांगुरिया
करौली की कैला देवी की अराधना में गाये जाने वाले भक्तिगीत लांगुरिया कहलाते है।
26. गोरबंध
गोरबंध, ऊंट के गले का आभूषण है। मारवाड़ तथा शेखावटी क्षेत्र में इस आभूषण पर गीत गाया जाता है।
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चिरमी के पौधे को सम्बोधित कर बाल ग्राम वधू द्वारा अपने भाई व पिता की प्रतिक्षा के समय की मनोदशा का वर्णन है।
28. पणिहारी
इस लोकगीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रता धर्म पर अटल रहना बताया गया है।
29. इडुणी
यह गीत पानी भरने जाते समय स्त्रियों द्वारा गाया जाता है। इसमें इडुणी के खो जाने का जिक्र होता है।
30. केसरिया बालम
यह एक प्रकार का विरह युक्त रजवाड़ी गीत है जिसे स्त्री विदेश गए हुए अपने पति की याद में गाती है।
31. धुडला गीत
मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है, जो स्त्रियों द्वारा घुड़ला पर्व पर गाया जाता है।
32. लावणी गीत(मोरध्वज, सेऊसंमन- प्रसिद्ध लावणियां)
लावणी से अभिप्राय बुलावे से है। नायक द्वारा नायिका को बुलाने के सन्दर्भ में लावणी गाई जाती है।
33. मूमल
जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत, जिसमें लोद्रवा की राजकुमारी मूमल का सौन्दर्य वर्णन किया गया है। यह एक श्रृंगारिक गीत है।
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🔴✔️ प्रमुख बौद्ध संगीतियां व उसके अध्यक्ष 🔴✔️
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🔵 प्रथम बौद्ध संगीति
▪️ समय : 483 ई.पू.
▪️स्थल : सप्तपर्णि गुफा राजगृह/राजगीर
▪️शासक : अजातशत्रु
▪️अध्यक्ष : महाकश्यप
🔴 द्वितीय बौद्ध संगीति
▪️383 ई. पू. (बुद्ध के निर्वाण के सौ वर्ष बाद)
▪️स्थान : वैशाली (बिहार)
▪️शासक : कालाशोक (शिशुनाग वंश)
▪️अध्यक्ष : स्थविर यश
🟢 तृतीय बौद्ध संगीति
▪️समय : 250 ई.पू.
▪️स्थान : पाटलिपुत्र (तत्कालीन मगध की राजधानी)
▪️शासक : अशोक
▪️अध्यक्ष : मोग्गलिपुत्त तिस्स
🟣 चतुर्थ बौद्ध संगीति
▪️समय : प्रथम शताब्दी
▪️स्थान : कुंडलवन
▪️शासक : कनिष्क
▪️अध्यक्ष : वसुमित्र
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🔵 प्रथम बौद्ध संगीति
▪️ समय : 483 ई.पू.
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▪️अध्यक्ष : महाकश्यप
🔴 द्वितीय बौद्ध संगीति
▪️383 ई. पू. (बुद्ध के निर्वाण के सौ वर्ष बाद)
▪️स्थान : वैशाली (बिहार)
▪️शासक : कालाशोक (शिशुनाग वंश)
▪️अध्यक्ष : स्थविर यश
🟢 तृतीय बौद्ध संगीति
▪️समय : 250 ई.पू.
▪️स्थान : पाटलिपुत्र (तत्कालीन मगध की राजधानी)
▪️शासक : अशोक
▪️अध्यक्ष : मोग्गलिपुत्त तिस्स
🟣 चतुर्थ बौद्ध संगीति
▪️समय : प्रथम शताब्दी
▪️स्थान : कुंडलवन
▪️शासक : कनिष्क
▪️अध्यक्ष : वसुमित्र
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Forwarded from Taiyari Karlo (Rajasthan)
🔰2 February Schedule
🔰इसका कल शाम वीडियो सॉल्यूशन विजयपाल सर द्वारा शाम 6:00 बजे लाइव किया जाएगा
🔰JOIN :- @TAIYARI_KARLO
🔰इसका कल शाम वीडियो सॉल्यूशन विजयपाल सर द्वारा शाम 6:00 बजे लाइव किया जाएगा
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Forwarded from Taiyari Karlo (Rajasthan)
Paper solution question & ncret book photo.pdf
2.2 MB
🔰NCERT BOOKS, योग्यता चयन टेस्ट के 100 प्रश्नों का हल,
🔰JOIN :- @TAIYARI_KARLO
VIdeo solution👉👉https://youtu.be/7Py4ZIn5Usw
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Taiyari Karlo (Rajasthan)
🔰2 February Schedule 🔰इसका कल शाम वीडियो सॉल्यूशन विजयपाल सर द्वारा शाम 6:00 बजे लाइव किया जाएगा 🔰JOIN :- @TAIYARI_KARLO
आज शाम 6:00 बजे आयोजित यूट्यूब लाइव टेस्ट का शेड्यूल
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पूरी दुनिया में 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetland Day) के रूप में मनाया गया। गौरतलब है कि आर्द्रभूमि दिवस का आयोजन लोगों और हमारे ग्रह के लिये आर्द्रभूमि की महत्त्वपूर्ण भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिये किया जाता है।
प्रमुख बिंदु
इसी दिन वर्ष 1971 में ईरान के शहर रामसर में कैस्पियन सागर के तट पर आर्द्रभूमि पर एक अभिसमय (Convention on Wetlands) को अपनाया गया था।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस पहली बार 2 फरवरी, 1997 को रामसर सम्मलेन के 16 वर्ष पूरे होने पर मनाया गया था।
वर्ष 2019 के लिये विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम ‘आर्द्रभूमि और जलवायु परिवर्तन’ (Wetlands and Climate Change) थी।
आर्द्रभूमि/वेटलैंड्स पर रामसर अभिसमय/कन्वेंशन की स्थायी समिति द्वारा अगले दो वर्षों 2020 और 2021 के लिये स्वीकृत की गई थीम्स हैं-
2020- आर्द्रभूमि और जैव-विविधता (Wetlands and Biodiversity)
2021- आर्द्रभूमि और जल (Wetlands and Water)
@Taiyari_Karlo
पूरी दुनिया में 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetland Day) के रूप में मनाया गया। गौरतलब है कि आर्द्रभूमि दिवस का आयोजन लोगों और हमारे ग्रह के लिये आर्द्रभूमि की महत्त्वपूर्ण भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिये किया जाता है।
प्रमुख बिंदु
इसी दिन वर्ष 1971 में ईरान के शहर रामसर में कैस्पियन सागर के तट पर आर्द्रभूमि पर एक अभिसमय (Convention on Wetlands) को अपनाया गया था।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस पहली बार 2 फरवरी, 1997 को रामसर सम्मलेन के 16 वर्ष पूरे होने पर मनाया गया था।
वर्ष 2019 के लिये विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम ‘आर्द्रभूमि और जलवायु परिवर्तन’ (Wetlands and Climate Change) थी।
आर्द्रभूमि/वेटलैंड्स पर रामसर अभिसमय/कन्वेंशन की स्थायी समिति द्वारा अगले दो वर्षों 2020 और 2021 के लिये स्वीकृत की गई थीम्स हैं-
2020- आर्द्रभूमि और जैव-विविधता (Wetlands and Biodiversity)
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8%
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7%
5:00PM
7%
6:00PM
7%
7:00PM
21%
8:00PM
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🔰 NCERT CLASS 6TH FIRST TEST [ 2 FEB TEST ]
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