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विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2021
थीम 2021 : डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय के लिए एक आह्वान।
•संयुक्त राष्ट्र के अनुसार “पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमें दो राय नहीं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस विकास ने नए अवसर प्रदान करने के साथ ही 2020 की महामारी के दौरान 'घर से काम करने' की सुविधाओं में मदद दी है।“ परन्तु इस डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय एक जरुरी आवश्यकता बन गया है क्योंकि बहुतों के पास डिजिटल बुनियादी ढांचे और आवश्यक धन की उपलब्धता नहीं होने के कारण पारंपरिक कामकाज, स्थानीय मजदूरी अर्जक व छोटे व्यवसाय अनुचित प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। निसंदेह उन लोगों के पास डिजिटल परिवर्तनों को निरंतर बनाए रखने की क्षमता नहीं है।
दिवस का उद्देश्य :
•लैंगिक समानता, स्वदेशी व प्रवासी लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देने के साथ ही पूर्ण रोजगार और सामाजिक एकीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर केंद्रित है।
•वर्ष 2009 में यह दिवस पहली बार मनाया गया था।
इतिहास :
•1995 - कोपेनहेगन, डेनमार्क में सामाजिक विकास के लिए विश्व शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें तय किया गया कि लोगों को विकास योजनाओं के केंद्र में रखने की आवश्यकता है।
•2005 - संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास के लिए कोपेनहेगन और कार्यक्रम की कार्रवाई की घोषणा की।
•26 नवंबर, 2007 - संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 फरवरी के दिन को सामाजिक न्याय के विश्व दिवस के रूप में घोषित किया।
•10 जून 2008 - अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने सर्वसम्मति से निष्पक्ष वैश्वीकरण हेतु सामाजिक न्याय सम्बन्धी एक घोषणा को अपनाया। जो कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में अपनाए गए 1919 के ILO के संविधान की सैद्धांतिक नीतियों का तीसरा प्रमुख वक्तव्य है। यह वर्ष 1944 के “फिलाडेल्फिया घोषणा तथा मौलिक सिद्धांतों” एवं 1998 के “कार्य पर अधिकार” की घोषणा पर तैयार है।
•वर्ष 2008 की घोषणा वैश्वीकरण के युग में ILO के जनादेश की समकालीन दृष्टि को जाहिर करती है।
@Taiyari_Karlo
विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2021
थीम 2021 : डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय के लिए एक आह्वान।
•संयुक्त राष्ट्र के अनुसार “पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमें दो राय नहीं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस विकास ने नए अवसर प्रदान करने के साथ ही 2020 की महामारी के दौरान 'घर से काम करने' की सुविधाओं में मदद दी है।“ परन्तु इस डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय एक जरुरी आवश्यकता बन गया है क्योंकि बहुतों के पास डिजिटल बुनियादी ढांचे और आवश्यक धन की उपलब्धता नहीं होने के कारण पारंपरिक कामकाज, स्थानीय मजदूरी अर्जक व छोटे व्यवसाय अनुचित प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। निसंदेह उन लोगों के पास डिजिटल परिवर्तनों को निरंतर बनाए रखने की क्षमता नहीं है।
दिवस का उद्देश्य :
•लैंगिक समानता, स्वदेशी व प्रवासी लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देने के साथ ही पूर्ण रोजगार और सामाजिक एकीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर केंद्रित है।
•वर्ष 2009 में यह दिवस पहली बार मनाया गया था।
इतिहास :
•1995 - कोपेनहेगन, डेनमार्क में सामाजिक विकास के लिए विश्व शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें तय किया गया कि लोगों को विकास योजनाओं के केंद्र में रखने की आवश्यकता है।
•2005 - संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास के लिए कोपेनहेगन और कार्यक्रम की कार्रवाई की घोषणा की।
•26 नवंबर, 2007 - संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 फरवरी के दिन को सामाजिक न्याय के विश्व दिवस के रूप में घोषित किया।
•10 जून 2008 - अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने सर्वसम्मति से निष्पक्ष वैश्वीकरण हेतु सामाजिक न्याय सम्बन्धी एक घोषणा को अपनाया। जो कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में अपनाए गए 1919 के ILO के संविधान की सैद्धांतिक नीतियों का तीसरा प्रमुख वक्तव्य है। यह वर्ष 1944 के “फिलाडेल्फिया घोषणा तथा मौलिक सिद्धांतों” एवं 1998 के “कार्य पर अधिकार” की घोषणा पर तैयार है।
•वर्ष 2008 की घोषणा वैश्वीकरण के युग में ILO के जनादेश की समकालीन दृष्टि को जाहिर करती है।
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21 फरवरी के Test का शेड्यूल
ये Test 21 FEB शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......
जिन भी विद्यार्थियों ने यह ... टेस्ट सीरीज नहीं ली है वह ले ले... यह टेस्ट सीरीज पूरे 5 महीने चलने वाली है.. इसमें आप का संपूर्ण पाठ्यक्रम बहुत अच्छे तरीके से कवर हो जाएगा
इसमें आपको संपूर्ण एनसीआरटी व अन्य सभी प्रतियोगी पुस्तक कवर की जाएगी....
✳150 टेस्ट सीरीज की विस्तृत जानकारी के लिए इस मैसेज को पढ़े :- https://t.me/Taiyari_karlo/12229
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21 फरवरी के Test का शेड्यूल
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🔰REET LEVAL-2 SST Test का शेड्यूल
👆🏻ये Test 20FEB सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा...... जो आप कभी भी दे सकते है
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22 फरवरी के Test का शेड्यूल
ये Test 22 FEB शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......
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👇भारत में आए प्रमुख विदेश यात्री👇
जॉइन @Taiyari_karlo
1. मेगस्थनीज:-
मेगस्थनीज यूनानी शासक सेल्यूकस का एक राजदूत था जो चन्द्रगुप्त के दरबार ( 305 ई. पू. ) में आया था । मेगस्थनीज कई वर्षों तक चंद्रगुप्त के दरबार में रहा । उसने भारत में जो कुछ भी देखा , उसका वर्णन उसने अपनी " इंडिका " नामक पुस्तक में किया । मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र का बहुत सुंदर वर्णन किया है उसका कहना है की भारत का सबसे बड़ा नगर पाटलिपुत्र है नगर चारों ओर से दीवारों से घिरा है इस नगर में अनेक फाटक और दुर्ग बने हैं । नगर में अधिकांश मकान लकड़ीयों के बने है ।
2. फ़ाह्यान :-
चीनी यीत्री फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में भारत आया । फ़ाह्यान ( 399-414 ई. ) तक भारत में रहा । फ़ाह्यान बौद्ध धर्म का अनुयायी था । फ़ाह्यान का उद्देश्य बौद्ध स्मृतियों एवं बौद्ध हस्तलिपियों की खोज करना था । इस प्रकार फ़ाह्यान ने उन स्थानों का ही भ्रमण किया जो बौद्ध धर्म से सम्बन्धित थे ।
3. ह्वेनसांग:-
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने हर्षवर्द्धन के शासन काल में भारत की यात्रा की । ह्वेगसांग ( 629-643 ) तक भारत में रहे । उसने अपनी पुस्तक सी - यू - की में अपनी यात्रा तथा भारत का विवरण दिया । इनके वर्णनों से ही हर्षवर्द्धन कालीन सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक तथा सास्कृतिक स्थिति के बारे में परिचय मिला है । ह्वेनसांग के प्रमाणों के कारण ही ज्ञात होता है कि हर्षवर्द्धन एक परिश्रमी तथा परोपकारी शासक था । ह्वेगसांग ने हर्षवर्द्धन की कलात्मक भावनाओं पर भी प्रकाश डाला है ।
4. इत्सिंग :-
इत्सिंग एक चीनी यात्री एवं बौद्ध भिक्षु था , वह नालंदा विश्वविद्यालय में 10 वर्षों तक रहा था , उसने वहाँ के प्रसिद्ध आचार्यों से संस्कृत तथा बौद्ध धर्म के को पढ़ा । इत्सिंग 675 ई . के समय सुमात्रा होकर समुद्र के मार्ग से भारत आया था । इन्होने ' नालन्दा ' एवं ' विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा उस समय के भारत पर प्रकाश डाला है । इत्सिंग ने 691 ई . में अपना प्रसिद्ध ग्रन्थ ' भारत तथा मलय द्विपपुंज में प्रचलित बौद्ध धर्म का विवरण ' लिखा । यह ग्रथं बौद्ध धर्म और ' संस्कृत साहित्य ' के इतिहास का स्रोत माना जाता है ।
5. अलबरूनी :-जॉइन @Taiyari_karlo
अलबरूनी का जन्म आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख्वारिज्म में सन् 973 में हुआ था । वह फारसी का एक प्रसिद्ध विद्वान था । उसने महमूद गजनवी की सेना के साथ भारत की यात्रा की थी । इसने ' तहकीक - ए - हिन्द ' नामक पुस्तक की रचना की । अलबरूनी द्वारा रचित कुल 14 पुस्तकों में ' किताब उल हिन्द ' सबसे अधिक लोकप्रिय पुस्तक है । उसकी इस पुस्तक को दक्षिण एशिया के इतिहास का प्रमुख स्रोत माना जाता है । अलबरूनी का असली नाम ' अबू रैहान मुहम्मद ' था , लेकिन वह ' अलबरूनी ' के नाम से ही अधिक प्रसिद्ध हुआ , जिसका अर्थ होता है , ' उस्ताद ' ।
6.मार्कोपोलो:-
मार्कोपोलो वेनिस यात्री था । यह एक इतालवी ( इटैलियन ) व्यापारी , खोजकर्ता और राजदूत था । इसका जन्म वेनिस गणराज्य में मध्य युग के अंत में हुआ था । मार्कोपोलो ने अपने पिता निकोलस पोलो और अपने चाचा , मातेयो के साथ सामुद्रिक यात्रा की थी । वह रेशम मार्ग की यात्रा करने वाला सर्वप्रथम यूरोपियनों में से एक था । उसने अपनी यात्रा 1271 में लाइआसुस बंदरगाह ( आर्मेनिया ) से प्रारंभ की थी । वेनिस से शूरू हुई अपनी यात्रा में वह कुस्तुनतुनिया से वोल्गा तट , वहाँ से सीरिया , फ़ारस , कराकोरम , और फिर कराकोरम से उत्तर की ओर बुखारा से होते हुए मध्य एशिया में स्टेपी के मैदानों से गुज़रकर पीकिंग पहुँचा । इस पुरी यात्रा में मोर्कोपोलो को साढ़े तीन वर्ष का समय लगा ।
7. इब्नबतूता :-
इब्नबतूता मोरक्को का यात्री था । इसका जन्म 24 फरवरी 1304 को हुआ था । इसका पूरा नाम अबू अब्दुल्ल मुहम्मद था । इब्नबतूता इनके कुल का नाम था । आगे चलकर अबू अब्दुल्ला मुहम्मद को इब्नबतूता के नाम से जाना गया । इन्होने ' रहला ' नामक पुस्तक लिखी । इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में भारत आया था । भारत के उत्तर पश्चिम द्वार से प्रवेश करके वह सीधा दिल्ली पहुंचा , जहाँ तुगलक सुल्तान मुहम्मद ने उसका बड़ा आदर सत्कार किया और उसे राजधानी का काजी नियुक्त किया ।
8. निकोलो कोंटी :-
निकोलो कोंटी इटली का यात्री था । निकोलो कोंटी विजयनगर आने वाला पहला विदेशी यात्री था । वह विजयनगर साम्राज्य के राजा देवराय के शासनकाल में 1420-21 ई . में भारत आया था । जो मध्य युग में मुस्लिम व्यापारी के वेष में इटली से भारत आया , इसने दक्षिण - पूर्व एशिया और चीन तक की यात्रा की । उसने अपनी यात्रा के विवरणों को लौटिन भाषा में लिखा , इसने यहाँ के शहर , राजदरबार , प्रथाओं , त्योहारों का वर्णन किया है ।
जॉइन @Taiyari_karlo
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1. मेगस्थनीज:-
मेगस्थनीज यूनानी शासक सेल्यूकस का एक राजदूत था जो चन्द्रगुप्त के दरबार ( 305 ई. पू. ) में आया था । मेगस्थनीज कई वर्षों तक चंद्रगुप्त के दरबार में रहा । उसने भारत में जो कुछ भी देखा , उसका वर्णन उसने अपनी " इंडिका " नामक पुस्तक में किया । मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र का बहुत सुंदर वर्णन किया है उसका कहना है की भारत का सबसे बड़ा नगर पाटलिपुत्र है नगर चारों ओर से दीवारों से घिरा है इस नगर में अनेक फाटक और दुर्ग बने हैं । नगर में अधिकांश मकान लकड़ीयों के बने है ।
2. फ़ाह्यान :-
चीनी यीत्री फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में भारत आया । फ़ाह्यान ( 399-414 ई. ) तक भारत में रहा । फ़ाह्यान बौद्ध धर्म का अनुयायी था । फ़ाह्यान का उद्देश्य बौद्ध स्मृतियों एवं बौद्ध हस्तलिपियों की खोज करना था । इस प्रकार फ़ाह्यान ने उन स्थानों का ही भ्रमण किया जो बौद्ध धर्म से सम्बन्धित थे ।
3. ह्वेनसांग:-
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने हर्षवर्द्धन के शासन काल में भारत की यात्रा की । ह्वेगसांग ( 629-643 ) तक भारत में रहे । उसने अपनी पुस्तक सी - यू - की में अपनी यात्रा तथा भारत का विवरण दिया । इनके वर्णनों से ही हर्षवर्द्धन कालीन सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक तथा सास्कृतिक स्थिति के बारे में परिचय मिला है । ह्वेनसांग के प्रमाणों के कारण ही ज्ञात होता है कि हर्षवर्द्धन एक परिश्रमी तथा परोपकारी शासक था । ह्वेगसांग ने हर्षवर्द्धन की कलात्मक भावनाओं पर भी प्रकाश डाला है ।
4. इत्सिंग :-
इत्सिंग एक चीनी यात्री एवं बौद्ध भिक्षु था , वह नालंदा विश्वविद्यालय में 10 वर्षों तक रहा था , उसने वहाँ के प्रसिद्ध आचार्यों से संस्कृत तथा बौद्ध धर्म के को पढ़ा । इत्सिंग 675 ई . के समय सुमात्रा होकर समुद्र के मार्ग से भारत आया था । इन्होने ' नालन्दा ' एवं ' विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा उस समय के भारत पर प्रकाश डाला है । इत्सिंग ने 691 ई . में अपना प्रसिद्ध ग्रन्थ ' भारत तथा मलय द्विपपुंज में प्रचलित बौद्ध धर्म का विवरण ' लिखा । यह ग्रथं बौद्ध धर्म और ' संस्कृत साहित्य ' के इतिहास का स्रोत माना जाता है ।
5. अलबरूनी :-जॉइन @Taiyari_karlo
अलबरूनी का जन्म आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख्वारिज्म में सन् 973 में हुआ था । वह फारसी का एक प्रसिद्ध विद्वान था । उसने महमूद गजनवी की सेना के साथ भारत की यात्रा की थी । इसने ' तहकीक - ए - हिन्द ' नामक पुस्तक की रचना की । अलबरूनी द्वारा रचित कुल 14 पुस्तकों में ' किताब उल हिन्द ' सबसे अधिक लोकप्रिय पुस्तक है । उसकी इस पुस्तक को दक्षिण एशिया के इतिहास का प्रमुख स्रोत माना जाता है । अलबरूनी का असली नाम ' अबू रैहान मुहम्मद ' था , लेकिन वह ' अलबरूनी ' के नाम से ही अधिक प्रसिद्ध हुआ , जिसका अर्थ होता है , ' उस्ताद ' ।
6.मार्कोपोलो:-
मार्कोपोलो वेनिस यात्री था । यह एक इतालवी ( इटैलियन ) व्यापारी , खोजकर्ता और राजदूत था । इसका जन्म वेनिस गणराज्य में मध्य युग के अंत में हुआ था । मार्कोपोलो ने अपने पिता निकोलस पोलो और अपने चाचा , मातेयो के साथ सामुद्रिक यात्रा की थी । वह रेशम मार्ग की यात्रा करने वाला सर्वप्रथम यूरोपियनों में से एक था । उसने अपनी यात्रा 1271 में लाइआसुस बंदरगाह ( आर्मेनिया ) से प्रारंभ की थी । वेनिस से शूरू हुई अपनी यात्रा में वह कुस्तुनतुनिया से वोल्गा तट , वहाँ से सीरिया , फ़ारस , कराकोरम , और फिर कराकोरम से उत्तर की ओर बुखारा से होते हुए मध्य एशिया में स्टेपी के मैदानों से गुज़रकर पीकिंग पहुँचा । इस पुरी यात्रा में मोर्कोपोलो को साढ़े तीन वर्ष का समय लगा ।
7. इब्नबतूता :-
इब्नबतूता मोरक्को का यात्री था । इसका जन्म 24 फरवरी 1304 को हुआ था । इसका पूरा नाम अबू अब्दुल्ल मुहम्मद था । इब्नबतूता इनके कुल का नाम था । आगे चलकर अबू अब्दुल्ला मुहम्मद को इब्नबतूता के नाम से जाना गया । इन्होने ' रहला ' नामक पुस्तक लिखी । इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में भारत आया था । भारत के उत्तर पश्चिम द्वार से प्रवेश करके वह सीधा दिल्ली पहुंचा , जहाँ तुगलक सुल्तान मुहम्मद ने उसका बड़ा आदर सत्कार किया और उसे राजधानी का काजी नियुक्त किया ।
8. निकोलो कोंटी :-
निकोलो कोंटी इटली का यात्री था । निकोलो कोंटी विजयनगर आने वाला पहला विदेशी यात्री था । वह विजयनगर साम्राज्य के राजा देवराय के शासनकाल में 1420-21 ई . में भारत आया था । जो मध्य युग में मुस्लिम व्यापारी के वेष में इटली से भारत आया , इसने दक्षिण - पूर्व एशिया और चीन तक की यात्रा की । उसने अपनी यात्रा के विवरणों को लौटिन भाषा में लिखा , इसने यहाँ के शहर , राजदरबार , प्रथाओं , त्योहारों का वर्णन किया है ।
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23 फरवरी के Test का शेड्यूल
ये Test 23 FEB शाम 4:00 बजे प्रारंभ होगा......
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साथियों आज बीकानेर में आयोजित महासेमिनार
जो विद्यार्थी आज नहीं पहुंच सके....... वह कल आ जाए महा मैराथन क्लास लगातार 23,24 फरवरी दो दिन ओर चलेगी
स्थान - पाठशाला इंस्टीट्यूट गौतम सर्किल जयनारायण व्यास कॉलोनी बीकानेर 11 am से 5 pm तक
जो विद्यार्थी आज नहीं पहुंच सके....... वह कल आ जाए महा मैराथन क्लास लगातार 23,24 फरवरी दो दिन ओर चलेगी
स्थान - पाठशाला इंस्टीट्यूट गौतम सर्किल जयनारायण व्यास कॉलोनी बीकानेर 11 am से 5 pm तक