*कृपया 2 मिनट निकाल कर इसे पढ़ने का और विचार करने का कष्ट करें...*
*युवा अंधकार की ओर...*
कुछ साल पहले तक
#सीकर_चुरू_झुझुनू_जोधपुर_नागौर_बाड़मेर_जैसलमेर_जालोर_पाली_सिरोही_बीकानेर क्षेत्र के युवा अपने परिवार, समाज और क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रख अपने कैरियर के लिए कड़ी मेहनत किया करते थे.
पर इन 4-5 सालों से पता नहीं किन लोगों व अपसंस्कृति के प्रभाव में आकर चकाचौंध की कृत्रिम दुनिया में खोते जा रहे हैं । सबसे ज्यादा असर पड़ा है सोशल मीडिया नेटवर्किंग का। जिन भाइयों को पढ़ाई, कोचिंग, भर्ती, कम्पीटिशन पर फोकस करना चाहिए वे फेसबुक पर नई नई स्टोरी लगाने, वाट्सएप पर स्टेटस लगाने,नए लुक में अपडेट होने, हरियाणवी लहजे में डॉन बनने, साथियों का एक ग्रुप बनाकर गैंगस्टर टाईप छवि बनाने, तेज स्पीड में बाइक चलाने, सारे दिन पब्जी खेलने, टिक-टोक के दीवाने, होटल मिडवे पर जाकर बर्थडे सेलिब्रेशन, रोड़ किनारे बैठकर बीयर पीने, शराब ठेकों पर झगड़ा करने, अपने पथभ्रष्ट साथियों के साथ मिल कर हथियारों के साथ फोटो अपडेट करना, बुलेट गेटवे स्कॉर्पियो केम्पर के साथ स्टंट करना, अपने आप को पोलिटिकल किंग मेकर समझने, उधारी के पैसों से गांजा, चरस, स्मेक, अफीम, डोडा, दारू पीने, सिगरेट फूंकने, हथियार लहराने का शौक रखने, इत्यादि इत्यादि ....
और इनमें से अधिकांशतया ग्रामीण पृष्ठभूमि के निम्न मध्यम वर्गीय किसान परिवारों के बच्चे हैं, जिन से उनके परिजन उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद रख रहे हैं ।
परंतु ये डीजे के डांसर अलग ही दुनिया में जा रहे हैं । यदि उनके परिवार वालों ने समय रहते इनको नहीं रोका तो इनका भविष्य अंधकार में हो जायेगा...ये दिग्भ्रमित लोग सीधे सरकार से टकराने की बात करतें हैं, पुलिस से हमेशा अपने को सुपर समझते हैं। यदि इसी तरह नशे में चूर रहे और समय रहते परिवारजनों तथा समाज के प्रबुद्ध जनों ने ध्यान नहीं दिया तो इसका परिणाम बहुत बुरा होगा ।
दरअसल, वैसे यह कल्चर कमोबेश हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है और इसके पीछे कुछेक मुख्य कारण जो है उनमें से कुछ इस प्रकार हैं ।
*पहला* चमक-दमक, अपने आप को सुपर बताने और दिखाने का आकर्षण । हरियाणा-पंजाब जैसे सम्पन्न प्रदेश के युवा अगर कुछ कर रहे हैं तो वो पहले से ही सम्पन्न हैं, हालाँकि उन प्रदेशों में भी बहुत से युवा अपराध के अंधकार भरे रास्तों की ओर जाने-अनजाने बढ़ रहे हैं...सम्पन्न होने के बावजूद भी इन इलाकों से भी नैतिक/सांस्कृतिक गिरावट की बातें सुनने में आ रही हैं...परन्तु हमारे यहां के युवा, खासकर जो अभी-अभी यौवन की ओर बढ़ रहे हैं, उनके हाथों में एंड्रॉयड फोन आते ही वो हरियाणा के लठेतों को, और उनके फेसबुकिया ठाठ को देखकर बहुत जल्दी वैसे ही दिखने बनने की दिशा में चल निकलते हैं ।
*दूसरा* कारण लोकल राजनीति भी इस खेल में बहुत ज्यादा जिम्मेदार है । आजकल के चुनावी सीजन में हर नेता को इन फेसबुकिया युवाओं की टीम चाहिए, जो 5-7 गाड़ियों में भरकर जिंदाबाद के नारे लगाते रहें, इसके बदले हर रात उन्हें चुनाव के दौरान फ्री की शराब और खाने-पीने की सुविधा मिल जाती है; ऐसे माहौल में ये नासमझ उन नेताओं को अपना गॉडफादर समझने लग जाते हैं और नेताजी का भविष्य तो सुरक्षित पर खुद इनका भविष्य चौपट ।
*तीसरा* परिवार व समाज की अनदेखी और निष्क्रियता....आज समाज और परिवारों में इतना विखंडन बढ़ गया कि अगर पता भी चल जाता है कि कोई गलत दिशा में जा रहा है तो भी हम कोई कदम नही उठा पाते । इसका एक कारण बुरा बनने से बचने की भावना भी है । पहले गांव में कोई बदमाशी करता तो उसे गांव के दूसरे लोग ही टोक देते थे, पर अब कोई किसी को नहीं टोकता; और टोके भी कैसे, बेचारे की उसी की बेइज्जती कर दें। परिवार वालों की सुनते नही, ऐसे में "कोई कुएं में पड़े और भाड़ में जाएं" की मनोवृत्ति धीरे धीरे जड़ें मजबूत करती जा रही है ।
इस प्रकार ये भटके जीव हो जाते हैं अविवेकी और कुंठित, गुस्सा इनके नाक पर, कोई कुछ बोल दे तो मरने मारने को तैयार, शौक पूरे करने के लिए हर हद तक जाने को तैयार । बढ़ते नशे के प्रचलन, अवैध हथियारों के शौक, इश्कबाजी और गैंग्स प्रवृत्ति ने हमारे क्षेत्र के बहुत से युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल दिया है ।
अपराध संबंधी घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं; आने वाले समय मे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति बार बार हो सकती है । अभी समय है हमारे पास कि हम सचेत और जागरूक होकर इस बर्बादी के रास्ते पर अंकुश लगा सकें । इसके लिए समाज के सभी जिम्मेदार नागरिकों को, हर पार्टी दल के राजनैतिक व्यक्तियों को, प्रबुद्धजनों को, प्रशासन को सबको जागरूक होकर उचित कदम उठाने होंगे, नहीं तो हमारा युवा वर्ग नकारात्मक मार्ग पर इतना आगे बढ़ जाएगा कि पछतावे के अलावा कुछ नहीं होगा ।
*युवा अंधकार की ओर...*
कुछ साल पहले तक
#सीकर_चुरू_झुझुनू_जोधपुर_नागौर_बाड़मेर_जैसलमेर_जालोर_पाली_सिरोही_बीकानेर क्षेत्र के युवा अपने परिवार, समाज और क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रख अपने कैरियर के लिए कड़ी मेहनत किया करते थे.
पर इन 4-5 सालों से पता नहीं किन लोगों व अपसंस्कृति के प्रभाव में आकर चकाचौंध की कृत्रिम दुनिया में खोते जा रहे हैं । सबसे ज्यादा असर पड़ा है सोशल मीडिया नेटवर्किंग का। जिन भाइयों को पढ़ाई, कोचिंग, भर्ती, कम्पीटिशन पर फोकस करना चाहिए वे फेसबुक पर नई नई स्टोरी लगाने, वाट्सएप पर स्टेटस लगाने,नए लुक में अपडेट होने, हरियाणवी लहजे में डॉन बनने, साथियों का एक ग्रुप बनाकर गैंगस्टर टाईप छवि बनाने, तेज स्पीड में बाइक चलाने, सारे दिन पब्जी खेलने, टिक-टोक के दीवाने, होटल मिडवे पर जाकर बर्थडे सेलिब्रेशन, रोड़ किनारे बैठकर बीयर पीने, शराब ठेकों पर झगड़ा करने, अपने पथभ्रष्ट साथियों के साथ मिल कर हथियारों के साथ फोटो अपडेट करना, बुलेट गेटवे स्कॉर्पियो केम्पर के साथ स्टंट करना, अपने आप को पोलिटिकल किंग मेकर समझने, उधारी के पैसों से गांजा, चरस, स्मेक, अफीम, डोडा, दारू पीने, सिगरेट फूंकने, हथियार लहराने का शौक रखने, इत्यादि इत्यादि ....
और इनमें से अधिकांशतया ग्रामीण पृष्ठभूमि के निम्न मध्यम वर्गीय किसान परिवारों के बच्चे हैं, जिन से उनके परिजन उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद रख रहे हैं ।
परंतु ये डीजे के डांसर अलग ही दुनिया में जा रहे हैं । यदि उनके परिवार वालों ने समय रहते इनको नहीं रोका तो इनका भविष्य अंधकार में हो जायेगा...ये दिग्भ्रमित लोग सीधे सरकार से टकराने की बात करतें हैं, पुलिस से हमेशा अपने को सुपर समझते हैं। यदि इसी तरह नशे में चूर रहे और समय रहते परिवारजनों तथा समाज के प्रबुद्ध जनों ने ध्यान नहीं दिया तो इसका परिणाम बहुत बुरा होगा ।
दरअसल, वैसे यह कल्चर कमोबेश हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है और इसके पीछे कुछेक मुख्य कारण जो है उनमें से कुछ इस प्रकार हैं ।
*पहला* चमक-दमक, अपने आप को सुपर बताने और दिखाने का आकर्षण । हरियाणा-पंजाब जैसे सम्पन्न प्रदेश के युवा अगर कुछ कर रहे हैं तो वो पहले से ही सम्पन्न हैं, हालाँकि उन प्रदेशों में भी बहुत से युवा अपराध के अंधकार भरे रास्तों की ओर जाने-अनजाने बढ़ रहे हैं...सम्पन्न होने के बावजूद भी इन इलाकों से भी नैतिक/सांस्कृतिक गिरावट की बातें सुनने में आ रही हैं...परन्तु हमारे यहां के युवा, खासकर जो अभी-अभी यौवन की ओर बढ़ रहे हैं, उनके हाथों में एंड्रॉयड फोन आते ही वो हरियाणा के लठेतों को, और उनके फेसबुकिया ठाठ को देखकर बहुत जल्दी वैसे ही दिखने बनने की दिशा में चल निकलते हैं ।
*दूसरा* कारण लोकल राजनीति भी इस खेल में बहुत ज्यादा जिम्मेदार है । आजकल के चुनावी सीजन में हर नेता को इन फेसबुकिया युवाओं की टीम चाहिए, जो 5-7 गाड़ियों में भरकर जिंदाबाद के नारे लगाते रहें, इसके बदले हर रात उन्हें चुनाव के दौरान फ्री की शराब और खाने-पीने की सुविधा मिल जाती है; ऐसे माहौल में ये नासमझ उन नेताओं को अपना गॉडफादर समझने लग जाते हैं और नेताजी का भविष्य तो सुरक्षित पर खुद इनका भविष्य चौपट ।
*तीसरा* परिवार व समाज की अनदेखी और निष्क्रियता....आज समाज और परिवारों में इतना विखंडन बढ़ गया कि अगर पता भी चल जाता है कि कोई गलत दिशा में जा रहा है तो भी हम कोई कदम नही उठा पाते । इसका एक कारण बुरा बनने से बचने की भावना भी है । पहले गांव में कोई बदमाशी करता तो उसे गांव के दूसरे लोग ही टोक देते थे, पर अब कोई किसी को नहीं टोकता; और टोके भी कैसे, बेचारे की उसी की बेइज्जती कर दें। परिवार वालों की सुनते नही, ऐसे में "कोई कुएं में पड़े और भाड़ में जाएं" की मनोवृत्ति धीरे धीरे जड़ें मजबूत करती जा रही है ।
इस प्रकार ये भटके जीव हो जाते हैं अविवेकी और कुंठित, गुस्सा इनके नाक पर, कोई कुछ बोल दे तो मरने मारने को तैयार, शौक पूरे करने के लिए हर हद तक जाने को तैयार । बढ़ते नशे के प्रचलन, अवैध हथियारों के शौक, इश्कबाजी और गैंग्स प्रवृत्ति ने हमारे क्षेत्र के बहुत से युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल दिया है ।
अपराध संबंधी घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं; आने वाले समय मे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति बार बार हो सकती है । अभी समय है हमारे पास कि हम सचेत और जागरूक होकर इस बर्बादी के रास्ते पर अंकुश लगा सकें । इसके लिए समाज के सभी जिम्मेदार नागरिकों को, हर पार्टी दल के राजनैतिक व्यक्तियों को, प्रबुद्धजनों को, प्रशासन को सबको जागरूक होकर उचित कदम उठाने होंगे, नहीं तो हमारा युवा वर्ग नकारात्मक मार्ग पर इतना आगे बढ़ जाएगा कि पछतावे के अलावा कुछ नहीं होगा ।
समाज के प्रत्येक जागरूक व संजीदा व्यक्ति से विशेष आग्रह है कि इस पोस्ट को आगे से आगे शेयर करें; जनजागृति चलाएं और यदि इस तरह का कोई युवा आपको भटका हुआ मिल जाता है तो उसको समझा करके पुनः सामाजिक सरोकार के अंदर जोड़ना है...यदि आपने अपने प्रयास से किसी एक युवा को भी समाज की मुख्यधारा में अपने जोड़ दिया तो यह अपने आप में समाज और मानवता की एक बहुत बड़ी सेवा हो जाएगी ।
*ये युवा परिवार/समाज और देश का भविष्य हैं,*
*हो सके तो इनको बचा लो, कहीं देर ना हो जाये !*
विजय रोझ इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस
*ये युवा परिवार/समाज और देश का भविष्य हैं,*
*हो सके तो इनको बचा लो, कहीं देर ना हो जाये !*
विजय रोझ इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस
👍1
कर्णभूषण और काव्य डाकिनी नामक ग्रंथ है ।
Anonymous Quiz
31%
चिंतामणि भट्ट
41%
राव कर्णसिंह
19%
मुहनोत नैंसी
10%
गंगानंद मैथिल
" हरित राजस्थान " कार्यक्रम का संबंध किससे है ।
Anonymous Quiz
33%
कृषि विकास
57%
वृक्षारोपण
8%
जल संरक्षण
2%
पशुधन
राजस्थान की किस जनजाति में "उदरिया पंथ" की मान्यता है।
Anonymous Quiz
29%
भील जनजाति में
42%
कथोड़ी जनजाति में
18%
मीणा जनजाति में
11%
सहरिया जनजाति में
"इकतीसंदा" रुपया राजस्थान की कौनसी टकसाल में बनता था ।
Anonymous Quiz
21%
जोधपुर
31%
सोजत
42%
कुचामन
6%
मेड़ता
निम्नलिखित में से किस उत्खनन स्थल से चांदी की मुद्रा "पंचमार्क" प्राप्त हुई है
Anonymous Quiz
16%
कालीबंगा
31%
गणेश्वर
35%
आहड
19%
बेराठ
निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है ।
Anonymous Quiz
20%
जमुनादास
33%
नानकराम
26%
नंदराम
21%
बक्साराम
भरतपुर में सिमको वैगन फैक्ट्री की स्थापना कब हुई ?
Anonymous Quiz
16%
1952
43%
1961
32%
1957
9%
1965
20 वीं पशुगणना की शुरुआत कब हुई ।
Anonymous Quiz
16%
1 अक्टूबर , 2018
30%
1 अक्टूबर ,2017
41%
1 अक्टूबर ,2019
14%
1 अक्टूबर ,2020
😁1