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आशु सर ने क्लास में उठाया डंडा तो सब कुछ याद आ गया एक नम्बर का सवाल है देखना ना भूले 😡😡
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राज्य सूचना आयोग का गठन
प्रत्येक राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सूचना आयोग के नाम से ज्ञात एक निकाय का गठन करेगी, जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा, जो उसे इस अधिनियम के अधीन सौंपे जाएँ।
राज्य सूचना आयोग में होंगे :
(i) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त; और
(ii) दस से अनधिक उतनी संख्या में राज्य सूचना आयुक्त, जितने आवश्यक समझे जाएँ।
नियुक्ति
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्नलिखित से मिलकर बनी, किसी समिति की सिफारिश पर की जाएगी
(i) मुख्यमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा;
(ii) विधानसभा में विपक्ष का नेता; और
(iii) मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्देशित किया जाने वाला मंत्रिमण्डल का सदस्य।
प्रत्येक राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सूचना आयोग के नाम से ज्ञात एक निकाय का गठन करेगी, जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा, जो उसे इस अधिनियम के अधीन सौंपे जाएँ।
राज्य सूचना आयोग में होंगे :
(i) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त; और
(ii) दस से अनधिक उतनी संख्या में राज्य सूचना आयुक्त, जितने आवश्यक समझे जाएँ।
नियुक्ति
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्नलिखित से मिलकर बनी, किसी समिति की सिफारिश पर की जाएगी
(i) मुख्यमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा;
(ii) विधानसभा में विपक्ष का नेता; और
(iii) मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्देशित किया जाने वाला मंत्रिमण्डल का सदस्य।
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प्र . राजपूतों की उत्पत्ति विषयक विभिन्न मत
पृथ्वीराज रासो के रचनाकार चंद्रवरदाई ने राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम अग्निकुल से उत्पत्ति का मत दिया।
नैंणसी और सूर्यमल मिश्रण ने इस मत को बढ़ा चढ़ाकर लिखा।
वशिष्ठ मुनि द्वारा अपने यज्ञ की राक्षसों से सुरक्षा करने के लिए आबू के यज्ञ कुंड से चार राजपूत योद्धा परमार, प्रतिहार, चौहान एवं चालुक्य उत्पन्न किए जिनसे इन राजपूत वंशों का आविर्भाव हुआ परंतु आज के वैज्ञानिक युग में यह मत इतिहास के पाठक को संतुष्ट नहीं कर पाता है।
राजपूत इतिहास के मर्मज्ञ डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने कई साहित्यिक एवं अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर राजपूतों को सूर्यवंशी चंद्रवंशी माना है।
कर्नल टॉड और स्मिथ जैसे विदेशी विद्वानों ने राजपूतों को शक और सिथियन जैसी विदेशी जातियों की संतान माना है।
डॉक्टर डी आर भंडारकर जैसे इतिहासकार ने भी राजपूतों को गुर्जर जाति से उत्पन्न मान कर विदेशी वंश उत्पत्ति के मत को दृढ़ता प्रदान की क्योंकि अनेक विद्वान गुर्जरों को विदेशी मानते हैं।
डॉक्टर भंडारकर ने कुछ राजपूत वंश को ब्राह्मण वंशीय भी माना है। बिजोलिया शिलालेख के आधार पर वह चौहानों को वत्स गोत्र ब्राह्मण मानते हैं लेकिन डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा और सी वी वैद्य ने भंडारकर के इस मत को अस्वीकार कर दिया।
इस प्रकार राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में कोई सर्वसम्मत मत स्थिर नहीं किया जा सका है।
यह कहा जा सकता है कि विदेशी जातियों का भारतीय युद्धोपजीवी जातियों में विलीनीकरण हो गया। प्राचीन क्षत्रिय शासकों के अवशेष रूप और शासक होने के कारण उन्हें राजपुत्र कहा जाने लगा और कालांतर में यही राजपुत्र ‘राजपूत’ के नाम से अभिहित किए गए।
पृथ्वीराज रासो के रचनाकार चंद्रवरदाई ने राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम अग्निकुल से उत्पत्ति का मत दिया।
नैंणसी और सूर्यमल मिश्रण ने इस मत को बढ़ा चढ़ाकर लिखा।
वशिष्ठ मुनि द्वारा अपने यज्ञ की राक्षसों से सुरक्षा करने के लिए आबू के यज्ञ कुंड से चार राजपूत योद्धा परमार, प्रतिहार, चौहान एवं चालुक्य उत्पन्न किए जिनसे इन राजपूत वंशों का आविर्भाव हुआ परंतु आज के वैज्ञानिक युग में यह मत इतिहास के पाठक को संतुष्ट नहीं कर पाता है।
राजपूत इतिहास के मर्मज्ञ डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने कई साहित्यिक एवं अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर राजपूतों को सूर्यवंशी चंद्रवंशी माना है।
कर्नल टॉड और स्मिथ जैसे विदेशी विद्वानों ने राजपूतों को शक और सिथियन जैसी विदेशी जातियों की संतान माना है।
डॉक्टर डी आर भंडारकर जैसे इतिहासकार ने भी राजपूतों को गुर्जर जाति से उत्पन्न मान कर विदेशी वंश उत्पत्ति के मत को दृढ़ता प्रदान की क्योंकि अनेक विद्वान गुर्जरों को विदेशी मानते हैं।
डॉक्टर भंडारकर ने कुछ राजपूत वंश को ब्राह्मण वंशीय भी माना है। बिजोलिया शिलालेख के आधार पर वह चौहानों को वत्स गोत्र ब्राह्मण मानते हैं लेकिन डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा और सी वी वैद्य ने भंडारकर के इस मत को अस्वीकार कर दिया।
इस प्रकार राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में कोई सर्वसम्मत मत स्थिर नहीं किया जा सका है।
यह कहा जा सकता है कि विदेशी जातियों का भारतीय युद्धोपजीवी जातियों में विलीनीकरण हो गया। प्राचीन क्षत्रिय शासकों के अवशेष रूप और शासक होने के कारण उन्हें राजपुत्र कहा जाने लगा और कालांतर में यही राजपुत्र ‘राजपूत’ के नाम से अभिहित किए गए।
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हाल ही में डीआरडीओ ने लड़ाकू ड्रोन अभ्यास का सफलतापूर्वक परीक्षण कहां पर किया है?
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66%
चांदीपुर उड़ीसा
34%
पोकरण राजस्थान
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कवास और पीवी परियोजना हाल ही में चर्चा में है यह किस राज्य में स्थित है?
Anonymous Quiz
47%
राजस्थान
53%
गुजरात
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