प्र . राजपूतों की उत्पत्ति विषयक विभिन्न मत
पृथ्वीराज रासो के रचनाकार चंद्रवरदाई ने राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम अग्निकुल से उत्पत्ति का मत दिया।
नैंणसी और सूर्यमल मिश्रण ने इस मत को बढ़ा चढ़ाकर लिखा।
वशिष्ठ मुनि द्वारा अपने यज्ञ की राक्षसों से सुरक्षा करने के लिए आबू के यज्ञ कुंड से चार राजपूत योद्धा परमार, प्रतिहार, चौहान एवं चालुक्य उत्पन्न किए जिनसे इन राजपूत वंशों का आविर्भाव हुआ परंतु आज के वैज्ञानिक युग में यह मत इतिहास के पाठक को संतुष्ट नहीं कर पाता है।
राजपूत इतिहास के मर्मज्ञ डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने कई साहित्यिक एवं अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर राजपूतों को सूर्यवंशी चंद्रवंशी माना है।
कर्नल टॉड और स्मिथ जैसे विदेशी विद्वानों ने राजपूतों को शक और सिथियन जैसी विदेशी जातियों की संतान माना है।
डॉक्टर डी आर भंडारकर जैसे इतिहासकार ने भी राजपूतों को गुर्जर जाति से उत्पन्न मान कर विदेशी वंश उत्पत्ति के मत को दृढ़ता प्रदान की क्योंकि अनेक विद्वान गुर्जरों को विदेशी मानते हैं।
डॉक्टर भंडारकर ने कुछ राजपूत वंश को ब्राह्मण वंशीय भी माना है। बिजोलिया शिलालेख के आधार पर वह चौहानों को वत्स गोत्र ब्राह्मण मानते हैं लेकिन डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा और सी वी वैद्य ने भंडारकर के इस मत को अस्वीकार कर दिया।
इस प्रकार राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में कोई सर्वसम्मत मत स्थिर नहीं किया जा सका है।
यह कहा जा सकता है कि विदेशी जातियों का भारतीय युद्धोपजीवी जातियों में विलीनीकरण हो गया। प्राचीन क्षत्रिय शासकों के अवशेष रूप और शासक होने के कारण उन्हें राजपुत्र कहा जाने लगा और कालांतर में यही राजपुत्र ‘राजपूत’ के नाम से अभिहित किए गए।
पृथ्वीराज रासो के रचनाकार चंद्रवरदाई ने राजपूतों की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम अग्निकुल से उत्पत्ति का मत दिया।
नैंणसी और सूर्यमल मिश्रण ने इस मत को बढ़ा चढ़ाकर लिखा।
वशिष्ठ मुनि द्वारा अपने यज्ञ की राक्षसों से सुरक्षा करने के लिए आबू के यज्ञ कुंड से चार राजपूत योद्धा परमार, प्रतिहार, चौहान एवं चालुक्य उत्पन्न किए जिनसे इन राजपूत वंशों का आविर्भाव हुआ परंतु आज के वैज्ञानिक युग में यह मत इतिहास के पाठक को संतुष्ट नहीं कर पाता है।
राजपूत इतिहास के मर्मज्ञ डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने कई साहित्यिक एवं अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर राजपूतों को सूर्यवंशी चंद्रवंशी माना है।
कर्नल टॉड और स्मिथ जैसे विदेशी विद्वानों ने राजपूतों को शक और सिथियन जैसी विदेशी जातियों की संतान माना है।
डॉक्टर डी आर भंडारकर जैसे इतिहासकार ने भी राजपूतों को गुर्जर जाति से उत्पन्न मान कर विदेशी वंश उत्पत्ति के मत को दृढ़ता प्रदान की क्योंकि अनेक विद्वान गुर्जरों को विदेशी मानते हैं।
डॉक्टर भंडारकर ने कुछ राजपूत वंश को ब्राह्मण वंशीय भी माना है। बिजोलिया शिलालेख के आधार पर वह चौहानों को वत्स गोत्र ब्राह्मण मानते हैं लेकिन डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा और सी वी वैद्य ने भंडारकर के इस मत को अस्वीकार कर दिया।
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यह कहा जा सकता है कि विदेशी जातियों का भारतीय युद्धोपजीवी जातियों में विलीनीकरण हो गया। प्राचीन क्षत्रिय शासकों के अवशेष रूप और शासक होने के कारण उन्हें राजपुत्र कहा जाने लगा और कालांतर में यही राजपुत्र ‘राजपूत’ के नाम से अभिहित किए गए।
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हाल ही में डीआरडीओ ने लड़ाकू ड्रोन अभ्यास का सफलतापूर्वक परीक्षण कहां पर किया है?
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66%
चांदीपुर उड़ीसा
34%
पोकरण राजस्थान
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कवास और पीवी परियोजना हाल ही में चर्चा में है यह किस राज्य में स्थित है?
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47%
राजस्थान
53%
गुजरात
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हाल ही में राष्ट्रमंडल देशों में दो नए राष्ट्रों को शामिल किया गया जो................... है ।
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63%
गैबोन & टोगो
37%
टोगो & जिबूती
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हाल ही में राजस्थान के किस जिले में आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व स्थापित किया गया है?
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82%
जयपुर
18%
अजमेर
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नरसाणा ग्राम पंचायत हाल ही में चर्चा में है राजस्थान के किस जिले में स्थित है
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43%
जयपुर
57%
जालौर
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राजस्थान का 100% सौर ऊर्जा से संचालित रेलवे स्टेशन कौन सा बना है?
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79%
गांधीनगर, जयपुर
21%
मेड़ता रोड़, नागौर
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