Taiyari Karlo (Rajasthan)
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" अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी हुई आसान 'तैयारी करलो' के साथ "

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48वीं "जी7" की बैठक कहां पर आयोजित हुई?
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ऑब्जेक्शन लगा सकते हैं.....

राजस्थान बोर्ड 10 वीं पुस्तक - पेज नम्बर-63 👇👇👇👇

👉मंदिरनुमा काष्ठकलाकृति जिसमें कई द्वार/कपाट होते हैं.... कावड़ कहलाती है ।

👉 बेवाण -यह भी लकड़ी की मंदिरनुमा सरंचना होती है, लेकिन कपाट नहीं होते ।
ठाकुर जी को देव झुलनी एकादसी पर बेवाण में ही विराजमान करवाया जाता है और जलाशय ले जाकर स्नान करवाया जाता है।
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ये भी ऑब्जेक्शन लगा सकते हो अगर गलत क्वेश्चन की प्रूफ है तो आप मुझे 8529429129 पर व्हाट्सएप कर दे

विजय रोझ इन्स्पेक्टर राज पुलिस
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राजस्थान के वन्य जीव (Wild Life in Rajasthan)

वनों के समान वनों में निवास करने वाले वन्य जीव प्राकृतिक पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं तथा जैव विविधता के प्रतीक है। राजस्थान के भौगोलिक पर्यावरण की विविधता अर्थात् जलवायु, उच्चावच, वनस्पति, मृदा, जल राशियों की भिन्नता के
कारण यहाँ विविध प्रकार के वन्य जीवों का आवास है, किन्तु इन वन्य जीवों को वर्तमान में संकट का सामना करना पड़ रहा है, यहाँ तक कि कई जीवों के अस्तित्व को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। राज्य में एक ओर जहाँ जंगली जानवरों की विविधता है तो दूसरी ओर शाकाहारी जीव तथा रेंगने वाले जीव भी हैं तथा विविध प्रकार के पक्षी यहाँ देखे जा सकते हैं।
मांसाहारी पशुओं में बाघ, तेन्दुआ, खरगोश, जरख, जंगली बिल्ली, बिज्जू, भेडिया, सियार, लोमड़ी, जंगली कुत्ता आदि हैं। बाघ मुख्यतया अलवर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, कोटा, झालावाड़, सिरोही, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बूंदी तथा डंगरपुर के जंगलों में पाए जाते हैं। जबकि पेन्थर सिरोही, उदयपुर, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, करौली, झालावाड़, कोटा एवं अजमेर जिलों में पाए जाते हैं। तेन्दुआ मुख्यतः भरतपुर, अलवर, जालौर, उदयपुर तथा चित्तौड़गढ़ जिलों में है।

शाकाहारी पशुओं में काला हिरण, चिंकारा, साँभर, नीलगाय, चीतल, चौसिंघा, भाल, जंगली सूअर, खरगोश, बन्दर, लंगूर प्रमुख हैं।

काला हिरण-चूरू, भरतपुर, सिरोही, जयपुर, बाड़मेर, अजमेर, कोटा में।

चिंकारा-भरतपुर, सवाई माधोपुर, जालौर, सिरोही, जयपुर, जोधपुर में।

साँभर-भरतपुर, अलवर, सवाई माधोपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़ जयपुर, बाड़मेर, अजमेर, डूंगरपुर व बाँसवाड़ा में।

नीलगाय-किशनगढ़, करौली, भरतपुर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा, गंगानगर में।

चीतल–भरतपुर में।

अनेक जिलों में, जहाँ वन एवं झाड़ियाँ हैं, खरगोश आदि देखे जा सकते हैं।
राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण है, जो दुर्गभ प्रजाति की श्रेणी में है। यह बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त मोर, तीतर, काला तीतर, तिजौर, बटेर, सारस, बुलबुल, नीलकंठ, दईयर, बाज, गिद्ध, मैना, नोता, कबूतर, चील, कौआ आदि अनेक पक्षी हैं। घना के पक्षी विहार को पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है, यहाँ का मुख्य आकर्षण प्रवासी साइबेरियन क्रेन है, जो यहाँ शीतकाल में आते हैं। इसी प्रकार फलौदी के निकट खींचन में कुरजां पक्षियों का प्रवास पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। वास्तव में राजस्थान जंगली पशु-पक्षियों की विविधता का स्रोत है।
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