Taiyari Karlo (Rajasthan)
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राजस्थान की नई भर्तियां 2022

12th / स्नातक के बाद किस की तैयारी करें

जिनके कॉन्स्टेबल में कम नंबर बन रहे हैं , वह किसकी तैयारी करें?

Video Link :-
https://youtu.be/OwavX1vswSE
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राजस्थान पुलिस कांस्टेबल कट ऑफ 2022 देखिए विजयपाल सर के साथ लाइव आज रात (9 JULY) 8:15PM बजे

RAJASTHAN POLICE CUT OFF 2022

Video Link :-
https://youtu.be/RNDYJbzct-U

वीडियो लिंक ओपन करके रिमाइंडर सेट कर लेवे, जिससे विजयपाल सर जब भी लाइव आएंगे तब आपको नोटिफिकेशन प्राप्त हो जाएगा
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सभी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

11 जुलाई को क्या है,स्पेशल अब आपका भी सरकारी नौकरी का सपना होगा पूरा

VIDEO LINK:-
https://youtu.be/H0f1XntkO44
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मृदा अपरदन की समस्या :
राजस्थान में मृदा अपरदन की समस्या गंभीर है और इससे अनेक क्षेत्रों में हजारों हैक्टेयर भूमि नष्ट हो रही है। यह अपरदन जल द्वारा एवं वायु द्वारा अधिक होता है, किन्तु मानव भी इसका एक कारक है। राजस्थान में मृदा अपरदन के प्रमुख कारण निम्नलिखित

(1) पश्चिमी राजस्थान में तीव्र गति से चलने वाली वायु के घर्षण से निरन्तर अपरदन होता रहता है। मरुस्थलीय प्रदेश में रेत असंगठित होती है। अतः वायु प्रवाह के साथ स्थानान्तरित होती रहती है। वायु द्वारा पर्वतीय घाटियों में भी कटाव होता है, किन्तु वह प्रभावशाली नहीं है। वायु मात्र अपरदन का ही कारक नहीं, अपितु निक्षेप का भी साधन है।

(2) पर्वतीय ढालों पर वर्षा का जल तीव्र गति से प्रवाहित होता है तो वह अपने साथ मृदा को बहा कर ले जाता है। अरावली एवं अन्य छोटी श्रेणियों के ढालों की नंगी चट्टानें एवं कँकरीली भूमि इसका प्रमाण है।

(3) नदियों एवं उनमें गिरने वाले छोटे-छोटे नालों द्वारा भूमि का कटाव, चम्बल एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा बनाए गए बीहड़ों से स्पष्ट है। हजारों हैक्टेयर भूमि इन बीहड़ों द्वारा नष्ट हो गई।

(4) विगत अनेक शताब्दियों से भूमि का उपयोग कृषि हेतु किया जा रहा है। कृषि के अवैज्ञानिक तरीकों से भूमि अपरदन में वृद्धि होती है।

(5) अनियन्त्रित पशु-चारण भी भूमि अपरदन के लिए उत्तरदायी है। विशेषकर भेड-चारण जिसमें हजारों की संख्या में भेड़ के रेवड़ न केवल वनस्पति को अपितु पैरों के खुरों से भूमि को भी नष्ट कर देते हैं।

(6)
वनों के निरन्तर हो रहे विनाश से भूमि अपरदन में वृद्धि हो रही है, क्योंकि वृक्षों की जड़ें भूमि को संगठित रखती हैं। अरावली की पहाड़ियों में आज यह एक गम्भीर समस्या है।


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