PM Sir Taiyari karlo 06-09-2025.pdf
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Forwarded from TARGET SI EXAM 2025
♦️राजस्थान में मंदिर निर्माण की शैलियाँ-
➖गुर्जर प्रतिहार महामारू) कालीन (8वीं-11वीं सदी)
➖मारू गुर्जर (सोलंकी/चालुक्य) (11वीं-13वीं सदी)
➖भूमिज शैली
➖हवेली शैली (16वीं-17वीं सदी)
✔️ गुर्जर प्रतिहार कालीन (स्थापत्य कला का स्वर्णकाल )मन्दिर स्थापत्य को 'महामारू शैली' कहा गया जिसमें विकसित नागर शैली के बड़े-बड़े मंदिर बने। इनमें अलंकृत जगती पर अवस्थिति, अलंकरण, गर्भगृह अंतराल, पखचतुष्की निरंधार, पंचायतन शैली का प्रयोग, पंचरथ विन्यास आदि विशेषताएँ हैं।
❄️गुर्जर-प्रतिहार कालीन मंदिर -
(i) हर्षद (हर्षत) माता का मंदिर, आभानेरी (दौसा)
(ii) ओसियाँ का महावीर मंदिर, हरिहर मंदिर एवं सूर्य मंदिर (जोधपुर)
(iii) कालिका माता एवं कुंभश्याम मंदिर (चित्तौड़गढ़)
(iv) आउवा (पाली) का कामेश्वर महादेव एवं सुगाली माता मंदिर
(v) हर्षनाथ का मंदिर (रैवासा, सीकर)
(vi) नीलकण्ठेश्वर मंदिर -जसनगर (मेड़ता, नागौर)
(vii) नीलकण्ठेश्वर मंदिर-राजोरगढ़ (सरिस्का, अलवर)
(viii) मरकंडी माता मंदिर- निमाज (ब्यावर)
(ix) अम्बिका माता का मंदिर, जगत् (उदयपुर)
(x) दधिमति माता मंदिर (गोठ मांगलोद, नागौर)
(xi) किराडू का सोमेश्वर मंदिर (बाड़मेर)
(xii) नकटीमाता मंदिर, जयभवानीपुर (जयपुर)
(xiii) आदिवराह मंदिर; आहड़ (उदयपुर)
(xiv) रणछोड़ मंदिर, खेड़ (बालोतरा )
➖गुर्जर प्रतिहार महामारू) कालीन (8वीं-11वीं सदी)
➖मारू गुर्जर (सोलंकी/चालुक्य) (11वीं-13वीं सदी)
➖भूमिज शैली
➖हवेली शैली (16वीं-17वीं सदी)
✔️ गुर्जर प्रतिहार कालीन (स्थापत्य कला का स्वर्णकाल )मन्दिर स्थापत्य को 'महामारू शैली' कहा गया जिसमें विकसित नागर शैली के बड़े-बड़े मंदिर बने। इनमें अलंकृत जगती पर अवस्थिति, अलंकरण, गर्भगृह अंतराल, पखचतुष्की निरंधार, पंचायतन शैली का प्रयोग, पंचरथ विन्यास आदि विशेषताएँ हैं।
❄️गुर्जर-प्रतिहार कालीन मंदिर -
(i) हर्षद (हर्षत) माता का मंदिर, आभानेरी (दौसा)
(ii) ओसियाँ का महावीर मंदिर, हरिहर मंदिर एवं सूर्य मंदिर (जोधपुर)
(iii) कालिका माता एवं कुंभश्याम मंदिर (चित्तौड़गढ़)
(iv) आउवा (पाली) का कामेश्वर महादेव एवं सुगाली माता मंदिर
(v) हर्षनाथ का मंदिर (रैवासा, सीकर)
(vi) नीलकण्ठेश्वर मंदिर -जसनगर (मेड़ता, नागौर)
(vii) नीलकण्ठेश्वर मंदिर-राजोरगढ़ (सरिस्का, अलवर)
(viii) मरकंडी माता मंदिर- निमाज (ब्यावर)
(ix) अम्बिका माता का मंदिर, जगत् (उदयपुर)
(x) दधिमति माता मंदिर (गोठ मांगलोद, नागौर)
(xi) किराडू का सोमेश्वर मंदिर (बाड़मेर)
(xii) नकटीमाता मंदिर, जयभवानीपुर (जयपुर)
(xiii) आदिवराह मंदिर; आहड़ (उदयपुर)
(xiv) रणछोड़ मंदिर, खेड़ (बालोतरा )
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आज आयोजित हुई RPSC 2nd Grade भर्ती परीक्षा का पेपर : Group A GK का पेपर ✅
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Forwarded from TARGET SI EXAM 2025
भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिली है। 4 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के दौरान सिंगापुर ने औपचारिक रूप से भारत की मलक्का जलडमरूमध्य में गश्त करने की योजना का समर्थन किया। यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गहरी साझेदारी और समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। विश्व के 60% से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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♦️प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुयाना के राष्ट्रपति इरफ़ान अली को चुनावों में जीत के लिए बधाई दी
❄️प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुयाना में हुए आम चुनावों और क्षेत्रीय चुनावों में शानदार जीत के लिए राष्ट्रपति इरफ़ान अली को बधाई दी है। गुयाना के राष्ट्रपति अली ने प्रधानमंत्री के संदेश के जवाब में दोनों देशों के बीच पहले से ही मज़बूत और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और सुदृढ बनाने के लिए श्री मोदी, भारत सरकार और भारत के लोगों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की है
❄️प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुयाना में हुए आम चुनावों और क्षेत्रीय चुनावों में शानदार जीत के लिए राष्ट्रपति इरफ़ान अली को बधाई दी है। गुयाना के राष्ट्रपति अली ने प्रधानमंत्री के संदेश के जवाब में दोनों देशों के बीच पहले से ही मज़बूत और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और सुदृढ बनाने के लिए श्री मोदी, भारत सरकार और भारत के लोगों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की है
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