Taiyari Karlo (Rajasthan)
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ब्रह्मपुत्र नदी पर भारत का पहला नदी-आधारित प्रकाशस्तंभ बनेगा (उत्तर पश्चिम-2)

भारत ने अंतर्देशीय जलमार्ग नौवहन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है, क्योंकि केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्‍ल्‍यू) सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर चार नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी है।

यह देश में अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाशस्तंभ संरचना की स्थापना का पहला उदाहरण है। गुवाहाटी के लाचित घाट पर आयोजित यह समारोह, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्‍ल्‍यू) के तत्वावधान में प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाश जहाज महानिदेशालय (डीजीएलएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

ये चारों स्थल - डिब्रूगढ़ जिले में बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) जिले में पांडू, नागांव जिले में सिलघाट (सभी नदी के दक्षिणी तट पर स्थित), और बिश्वनाथ जिले में बिश्वनाथ घाट (उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र स्थल) - ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के रणनीतिक बिंदुओं पर स्थित हैं, जो भारत के सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय माल और यात्री गलियारों में से एक है।

चारों प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है। प्रत्येक प्रकाशस्तंभ 20 मीटर ऊंचा होगा, जिसकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील और प्रकाशीय सीमा 8-10 समुद्री मील होगी, और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा।
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🖊️राजस्थान में अब कुल 5 रामसर साइट (Ramsar Sites) हैं।

✔️इनमें केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य (1981), सांभर झील (1990), फलोदी का खीचन वेटलैंड, उदयपुर का मेनार वेटलैंड (2025) और अलवर की सिलीसेढ़ झील शामिल हैं, जो प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं।
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राजस्थान की प्रमुख रामसर साइटें (Wetlands of Rajasthan):

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर): यह 1981 में घोषित राजस्थान की पहली रामसर साइट है।

सांभर झील (जयपुर/नागौर/अजमेर): यह भारत की सबसे बड़ी अंतरदेशीय खारे पानी की झील है, जिसे 1990 में रामसर स्थल घोषित किया गया था।

खीचन पक्षी अभयारण्य (फलौदी): यह साइट कुरजां (Demoiselle Cranes) के लिए प्रसिद्ध है, जिसे 2025 में मान्यता मिली।

मेनार वेटलैंड/बर्ड विलेज (उदयपुर): यह वल्लभनगर तहसील में स्थित है और यहाँ सैकड़ों प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं।

सिलीसेढ़ झील (अलवर): यह हाल ही में शामिल की गई 5वीं रामसर साइट है।
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राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) वाउचर योजना गर्भवती महिलाओं को मुफ्त सोनोग्राफी (Ultrasound) की सुविधा प्रदान करती है।

योजना की मुख्य तिथियाँ और विस्तार

पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत: 8 मार्च, 2024 को इसे पायलट आधार पर चुनिंदा जिलों में शुरू किया गया था।

शुरुआती जिले: यह योजना सबसे पहले बारां (Baran), भरतपुर (Bharatpur), और धौलपुर/फलोदी (Dholpur/Phalodi) जिलों में लागू की गई थी।

पूरे राजस्थान में लागू: पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे 8 अगस्त, 2024 को आधिकारिक तौर पर पूरे प्रदेश में लागू कर दिया।

योजना का विवरण और लाभ

मुफ्त सोनोग्राफी: इस योजना के तहत गर्भवती महिलाएँ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी सोनोग्राफी केंद्रों पर भी मुफ्त में टेस्ट करवा सकती हैं।

ई-वाउचर (E-Voucher): महिलाओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से एक QR कोड आधारित ई-वाउचर प्राप्त होता है।

वैधता (Validity): वाउचर जारी होने की तारीख से 30 दिनों के लिए वैध होता है। यदि किसी कारणवश सोनोग्राफी नहीं हो पाती, तो इसे एक बार 30 दिनों के लिए और बढ़ाया जा सकता है


पात्रता (Eligibility):

महिला कम से कम 84 दिन (3 महीने) की गर्भवती होनी चाहिए

वह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की लाभार्थी होनी चाहिए और PCTS सॉफ्टवेयर पर पंजीकृत होनी चाहिए
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