विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026
(#WorldNoTobaccoDay)
Theme: "Unmasking the appeal – countering nicotine and tobacco addiction."
इस दिवस को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा साल 1987 में की गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले नुकसान और जानलेवा बीमारियों के प्रति जागरूक करना है।
तंबाकू के कारण कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
हर साल वैश्विक स्तर पर लाखों लोग तंबाकू और धूम्रपान के दुष्प्रभावों के कारण अपनी जान गंवाते हैं।
'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' हमें याद दिलाता है कि एक स्वस्थ, तंबाकू-मुक्त जीवन चुनकर ही हम अपने और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित रख सकते हैं।
(#WorldNoTobaccoDay)
Theme: "Unmasking the appeal – countering nicotine and tobacco addiction."
इस दिवस को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा साल 1987 में की गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले नुकसान और जानलेवा बीमारियों के प्रति जागरूक करना है।
तंबाकू के कारण कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
हर साल वैश्विक स्तर पर लाखों लोग तंबाकू और धूम्रपान के दुष्प्रभावों के कारण अपनी जान गंवाते हैं।
'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' हमें याद दिलाता है कि एक स्वस्थ, तंबाकू-मुक्त जीवन चुनकर ही हम अपने और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित रख सकते हैं।
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एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम ने 31 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 27वें नौसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण किया ।
उन्होंने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम का स्थान लिया, जो 41 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
उन्होंने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम का स्थान लिया, जो 41 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
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डेयरी सेक्टर की रीढ़ और देश को पोषण देने वाली हमारी महिला किसानों को नमन!
इस बार 1 जून को मनाया जाने वाला विश्व दुग्ध दिवस, 'महिला किसानों का सम्मान' थीम पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र के FAO द्वारा 2001 में शुरू हुआ यह सफर आज भारत को दुनिया का लगभग एक-चौथाई दूध उत्पादक बना चुका है, जिसमें गुजरात शीर्ष पर है।
विश्व दुग्ध दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
इस बार 1 जून को मनाया जाने वाला विश्व दुग्ध दिवस, 'महिला किसानों का सम्मान' थीम पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र के FAO द्वारा 2001 में शुरू हुआ यह सफर आज भारत को दुनिया का लगभग एक-चौथाई दूध उत्पादक बना चुका है, जिसमें गुजरात शीर्ष पर है।
विश्व दुग्ध दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
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CamScanner 06-01-2026 1231_260601_124116.pdf
12 MB
आज आयोजित हुई RPSC 1st Grade भर्ती परीक्षा 2025 का पेपर : History विषय का पेपर
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महान स्वतंत्रता सेनानी, भारत के छठे राष्ट्रपति डॉ. नीलम संजीव रेड्डी बहुत कम उम्र में गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर देश की आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। उन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जेल की सज़ा भी काटी। भाषा के आधार पर जब 1956 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ, तो नीलम संजीव रेड्डी को वहाँ का पहला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
वह दो बार लोकसभा के स्पीकर चुने गए।
वे 25 जुलाई 1977 को भारत के छठे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए और उन्होंने 1982 तक इस पद को सुशोभित किया।
पुण्यतिथि पर सादर नमन
वह दो बार लोकसभा के स्पीकर चुने गए।
वे 25 जुलाई 1977 को भारत के छठे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए और उन्होंने 1982 तक इस पद को सुशोभित किया।
पुण्यतिथि पर सादर नमन
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बहुपक्षीय अभ्यास प्रगति 2026
1. आयोजन और स्थान: बहुपक्षीय अभ्यास 'प्रगति 2026' का पहला संस्करण मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में 72 घंटे के गहन परीक्षण अभ्यास के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
2. प्रगति (PRAGATI) का पूर्ण नाम: हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region)।
3. प्रतिभागी देश: इस अभ्यास में भारत के साथ कुल 13 मित्र देशों ने भाग लिया, जिनमें भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया और लाओस शामिल हैं।
4. सैन्य उपस्थिति: इस कार्यक्रम में इन देशों के 400 से अधिक सैनिक, 13 मित्र देशों के छह उप प्रमुख और 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हुए। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सभी गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी की।
5. मुख्य उद्देश्य: इस अभ्यास का प्राथमिक लक्ष्य अर्ध-पहाड़ी और जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए संयुक्त कौशल विकसित करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और सैन्य अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना था।
6. स्वदेशी रक्षा प्रदर्शनी: अभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने फिक्की (FICCI) के सहयोग से स्वदेशी रक्षा उपकरणों की एक प्रदर्शनी भी लगाई। इसका उद्देश्य 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं और डिजाइन को प्रदर्शित करना तथा रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना था।
7. द्विपक्षीय बैठकें: समापन के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भागीदार देशों के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक द्विपक्षीय बैठकें कीं ताकि क्षेत्रीय सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत किया जा सके
1. आयोजन और स्थान: बहुपक्षीय अभ्यास 'प्रगति 2026' का पहला संस्करण मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में 72 घंटे के गहन परीक्षण अभ्यास के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
2. प्रगति (PRAGATI) का पूर्ण नाम: हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region)।
3. प्रतिभागी देश: इस अभ्यास में भारत के साथ कुल 13 मित्र देशों ने भाग लिया, जिनमें भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया और लाओस शामिल हैं।
4. सैन्य उपस्थिति: इस कार्यक्रम में इन देशों के 400 से अधिक सैनिक, 13 मित्र देशों के छह उप प्रमुख और 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हुए। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सभी गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी की।
5. मुख्य उद्देश्य: इस अभ्यास का प्राथमिक लक्ष्य अर्ध-पहाड़ी और जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए संयुक्त कौशल विकसित करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और सैन्य अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना था।
6. स्वदेशी रक्षा प्रदर्शनी: अभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने फिक्की (FICCI) के सहयोग से स्वदेशी रक्षा उपकरणों की एक प्रदर्शनी भी लगाई। इसका उद्देश्य 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं और डिजाइन को प्रदर्शित करना तथा रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना था।
7. द्विपक्षीय बैठकें: समापन के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भागीदार देशों के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक द्विपक्षीय बैठकें कीं ताकि क्षेत्रीय सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत किया जा सके
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राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस 2026
1. ऐतिहासिक बैठक और स्थान: देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस 28 और 29 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र 'पूसा' परिसर में आयोजित की गई।
2. मुख्य नेतृत्व: इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। उनकी पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप तैयार किया गया है।
3. खेत बचाओ अभियान: श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा सम्मेलन में 'धरती बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ राष्ट्रीय 'खेत बचाओ अभियान' का आगाज़ किया। इसका उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।
4. प्राकृतिक खेती का संकल्प: कॉन्फ्रेंस की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि मंत्रियों ने केवल नीतिगत चर्चा ही नहीं की, बल्कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर राज्यों के कृषि मंत्रियों ने अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि वे किसानों के सामने उदाहरण पेश कर सकें।
5. मुख्य चर्चा के विषय: बैठक में खरीफ फसलों की तैयारी, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर गहन मंथन हुआ।
6. कृषि परिवर्तन का खाका: केंद्र, राज्य और वैज्ञानिकों ने एक साथ मिलकर खरीफ सीजन से पहले कृषि परिवर्तन का एक राष्ट्रीय खाका तैयार किया है। इसका मुख्य विजन 'बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए' रखा गया है।
1. ऐतिहासिक बैठक और स्थान: देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस 28 और 29 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र 'पूसा' परिसर में आयोजित की गई।
2. मुख्य नेतृत्व: इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। उनकी पहल पर कृषि आत्मनिर्भरता का रोडमैप तैयार किया गया है।
3. खेत बचाओ अभियान: श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा सम्मेलन में 'धरती बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ राष्ट्रीय 'खेत बचाओ अभियान' का आगाज़ किया। इसका उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।
4. प्राकृतिक खेती का संकल्प: कॉन्फ्रेंस की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि मंत्रियों ने केवल नीतिगत चर्चा ही नहीं की, बल्कि श्री शिवराज सिंह की अपील पर राज्यों के कृषि मंत्रियों ने अपने निजी खेतों में भी प्राकृतिक खेती के प्रयोग का संकल्प लिया, ताकि वे किसानों के सामने उदाहरण पेश कर सकें।
5. मुख्य चर्चा के विषय: बैठक में खरीफ फसलों की तैयारी, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर गहन मंथन हुआ।
6. कृषि परिवर्तन का खाका: केंद्र, राज्य और वैज्ञानिकों ने एक साथ मिलकर खरीफ सीजन से पहले कृषि परिवर्तन का एक राष्ट्रीय खाका तैयार किया है। इसका मुख्य विजन 'बड़ा पद नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए' रखा गया है।
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