राष्ट्रीय खेल दिवस 2026
थीम: "खेलेगा भारत, जीतेगा भारत"
यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर समर्पित है।राष्ट्रीय खेल दिवस देश में खेलों के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ाने का संदेश देता है।खेल हमारे जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व के गुण विकसित करते हैं।
भारत के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और मेहनत से विश्व मंच पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।खेलो इंडिया जैसी पहलों ने युवाओं को खेलों से जुड़ने के नए अवसर प्रदान किए हैं।खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की नींव भी हैं।
राष्ट्रीय खेल दिवस हमें हर उम्र में फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
आइए, खेलों को जीवन का हिस्सा बनाकर फिट भारत और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दें।
थीम: "खेलेगा भारत, जीतेगा भारत"
यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर समर्पित है।राष्ट्रीय खेल दिवस देश में खेलों के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ाने का संदेश देता है।खेल हमारे जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व के गुण विकसित करते हैं।
भारत के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और मेहनत से विश्व मंच पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।खेलो इंडिया जैसी पहलों ने युवाओं को खेलों से जुड़ने के नए अवसर प्रदान किए हैं।खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की नींव भी हैं।
राष्ट्रीय खेल दिवस हमें हर उम्र में फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
आइए, खेलों को जीवन का हिस्सा बनाकर फिट भारत और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दें।
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संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में ‘कहो कालिदास’ पुस्तक का विमोचन किया। श्री शेखावत ने कहा कि महान कवि कालिदास के जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है और उनके व्यक्तित्व को लेकर अलग-अलग मत हैं।
उन्होंने लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से कालिदास के व्यक्तित्व को समझने और उनके साहित्यिक जीवन को नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। ‘कहो कालिदास’ पुस्तक युगल जोशी ने लिखी है।
उन्होंने लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से कालिदास के व्यक्तित्व को समझने और उनके साहित्यिक जीवन को नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। ‘कहो कालिदास’ पुस्तक युगल जोशी ने लिखी है।
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दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ने राजधानी में नवनिर्मित प्रागैतिहासिक जीवन गैलरी का शुभारंभ किया।
राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र की अनुसंधान सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ. रसिक रवींद्र और राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली की कार्यकारी समिति की प्रोफेसर रमा जयसुंदर ने इसका उद्घाटन किया।
इस दीर्घा में डायनासोर और लाखों वर्ष पहले विलुप्त हो चुके अन्य जीवों के जीवन-आकार और छोटे आकार के एनिमेटेड रोबोटिक मॉडल उनके प्राकृतिक वातावरण में प्रदर्शित किए गए हैं।
यह दीर्घा आगंतुकों को लाखों वर्ष पहले पृथ्वी पर मौजूद जीवन और प्रागैतिहासिक दुनिया का अनुभव कराती है।
राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र की अनुसंधान सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ. रसिक रवींद्र और राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली की कार्यकारी समिति की प्रोफेसर रमा जयसुंदर ने इसका उद्घाटन किया।
इस दीर्घा में डायनासोर और लाखों वर्ष पहले विलुप्त हो चुके अन्य जीवों के जीवन-आकार और छोटे आकार के एनिमेटेड रोबोटिक मॉडल उनके प्राकृतिक वातावरण में प्रदर्शित किए गए हैं।
यह दीर्घा आगंतुकों को लाखों वर्ष पहले पृथ्वी पर मौजूद जीवन और प्रागैतिहासिक दुनिया का अनुभव कराती है।
गृह मंत्रालय ने केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से केरलम किया
गृह मंत्रालय ने दक्षिणी राज्य केरल का आधिकारिक नाम बदलकर केरलम कर दिया है। यह बदलाव 25 अगस्त से लागू हो गया है।
केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक 11 अगस्त को लोकसभा और अगले दिन राज्यसभा में पारित हुआ था। इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे कानून का रूप मिल गया। अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम केरलम हो गया है।
गृह मंत्रालय ने दक्षिणी राज्य केरल का आधिकारिक नाम बदलकर केरलम कर दिया है। यह बदलाव 25 अगस्त से लागू हो गया है।
केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक 11 अगस्त को लोकसभा और अगले दिन राज्यसभा में पारित हुआ था। इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे कानून का रूप मिल गया। अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम केरलम हो गया है।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने आईसीजीएस अजीत को भारतीय तटरक्षक बल को सौंपा
रक्षा क्षेत्र की प्रमुख सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) ने भारतीय तटरक्षक बल को अत्याधुनिक तेज गश्ती पोत (एफपीवी) आईसीजीएस अजीत (यार्ड 1277)—औपचारिक रूप से सौंपकर स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
65 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित आईसीजीएस अजीत भारत के घरेलू रक्षा पोत-निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
51.43 मीटर लंबे और 8 मीटर चौड़े इस पोत का भार विस्थापन 330 टन है और इसका ड्राफ्ट 2.5 मीटर है। यह दो समुद्री डीजल इंजनों से संचालित होता है, जो नियंत्रित पिच प्रोपेलर (सीपीपी) को घुमाते हैं
रक्षा क्षेत्र की प्रमुख सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) ने भारतीय तटरक्षक बल को अत्याधुनिक तेज गश्ती पोत (एफपीवी) आईसीजीएस अजीत (यार्ड 1277)—औपचारिक रूप से सौंपकर स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
65 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित आईसीजीएस अजीत भारत के घरेलू रक्षा पोत-निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
51.43 मीटर लंबे और 8 मीटर चौड़े इस पोत का भार विस्थापन 330 टन है और इसका ड्राफ्ट 2.5 मीटर है। यह दो समुद्री डीजल इंजनों से संचालित होता है, जो नियंत्रित पिच प्रोपेलर (सीपीपी) को घुमाते हैं
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